स्वर्ग-नरक के चक्कर में न पड़े-मोरारी बापू

भोपाल। लाल परेड स्थित मोतीलाल नेहरू स्टेडियम में राम कथा के छठवें दिन रविवार को मोरारी बापू ने श्रोताओं को राम नाम संकीर्तन की सरिता में गोते लगवाए। वहीं, जीवन की नैया पार लगाने के नए सूत्र भी दिए। उन्होंने कहा धर्म को बोझ मत समझो। धर्म बंधन नहीं, वह तो मुक्ति की राह दिखाता है। बस हर हाल में प्रसन्न रहो। प्रसन्न रहना भी बंदगी है। खचाखच भरे पंडाल में देश के कई अन्य राज्यों से आए भक्त भी मौजूद थे। बापू ने उनके प्रश्नों के उत्तर देने के साथ ही मार्गदर्शन भी दिया कि वे जीवन को सार्थक बनाने और संवारने के लिए क्या करें और क्या न करें।

स्वर्ग-नरक के चक्कर में न पड़े
राम कथा के माध्यम से जीवन जीने की कला को सरल व सहज तरीके से सिखाने का बापू का अपना एक विशिष्ट अंदाज है। अपनी इसी शैली में उन्होंने सहजता से सबको समझा दिया कि स्वर्ग-नरक के चक्कर में न पड़े। सब कुछ यहीं है। कर्म करते रहे, उसके अच्छे परिणाम जरूर मिलते हैं। उन्होंने कहा कि जगत में कुछ भी व्यर्थ नहीं है। विधि ने सब कुछ सुनियोजित रूप से रचा है। ईश्वर की इस सृष्टि में परिवर्तन है पर पुनरावर्तन नहीं है। यहां तक कि एक ही पेड़ के सभी पत्ते थोड़ा-थोड़ा अलग होते हैं। कुछ न कुछ फर्क उनमें अवश्य होता है।

बच्चों के बस्ते में भार न डालें
संतश्री ने अभिभावकों से कहा कि वे बच्चों पर बस्ते का भार न डालें। पढ़ाई को उनके लिए बोझ न बनने दें। बच्चों को आंगन भी दें। अर्थात खेलने का भी अवसर दें। उसका तनाव दूर हो जाएगा। बच्चे पढ़ते नहीं है, इसलिए उनकी निंदा न करें, बल्कि निदान खोजें। सत्य ही स्वर्ग है और निंदा नरक है। ये मान कर चलें। उन्होंने कहा कि स्वर्ग व बैकुंठ में भगवान मिल सकते हैं, पर उनकी कथा नहीं। असली स्वर्ग का आनंद तो उनकी कथा में है। उन्होंने कहा कि क्रोध न करें तो अच्छा है, पर कभी-कभी ये करना पड़ता है। क्रोध किन मौके पर न करें, ये बात उन्होंने बताई।

6 मौकों पर क्रोध न करें-
सुबह जब जागें, काम के लिए घर से निकलें, भोजन कर रहे हों तब, भजन के समय, घर लौटने पर और सोने के पूर्व। इन छह अवसरों पर सदैव क्रोध करने से बचना चाहिए। जीवन में शांति आएंगी और तनाव से मुक्ति मिलेगी। ऐसा होगा तब जीवन में प्रसन्नता का प्रवेश होने लगेगा।
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