संघ व विहिप ने एक वर्ष पहले लगाई थी योगी के नाम पर मुहर

लखनऊ, 18 मार्च । गोरक्षपीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ का नाम भले ही शनिवार को लोकभवन में आयोजित भाजपा विधायकों की बैठक में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर चयन किया गया है लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने एक वर्ष पहले ही मुख्यमंत्री के तौर पर महंत योगी आदित्यनाथ के नाम पर अपनी मुहर लगा दी थी। गौरतलब हो कि पिछले वर्ष 02 फरवरी को गोरक्षपीठ में ही संत सभा की बैठक हुई थी। इस बैठक में देशभर के करीब 500 संत धर्माचायों ने शिरकत की थी। इस बैठक में गोरक्षपीठ में योगी को मुख्यमंत्री बनाने की रणनीति बनी थी। बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रतिनिधि के तौर पर संघ के सह सरकार्यवाह डा. कृष्णगोपाल भी दो दिन तक गोरक्षपीठ में डेरा डाले थे। काफी विचार विमर्श के बाद देश के पूज्य संत धर्माचार्यों व विहिप पदाधिकारियों का मन टटोलने के बाद यहीं पर डा. कृष्ण गोपाल ने योगी के नाम पर मुहर लगाई थी। बैठक में संतों ने योगी को मुख्यमंत्री बनाने के पीछे अपने तर्क भी दिये थे। योगी आदित्यनाथ के गुरू स्व. पूज्य महंत अवैद्यनाथ श्रीरामजन्मभूमि आन्दोलन के अग्रणी संतों में थे और श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के अध्यक्ष भी थे। इसलिए संघ व विहिप के नेताओं की पहली पसंद योगी आदित्यनाथ ही थे। मोदी को भी संतों ने ही चुना था प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के लिए नरेन्द्र मोदी का नाम भी संतों ने ही तय किया था। 2011 में अहमदाबाद में हुई संत समाज की एक बैठक में पहली बार हिंदुत्व के नए चेहरे के तौर पर नरेंद्र मोदी का नाम 2014 प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तावित किया गया था। बाद में संत समाज की दिल्ली में हुई एक अन्य बैठक हुई जिसमें संघ के पदाधिकारियों ने शिरकत की थी। इसके बाद मोदी के नाम पर मुहर लगी थी। इसी प्रकार संत समाज की मुहर लगने के बाद संघ ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के लिए योगी के नाम पर मुहर लगायी थी। हिन्दुत्व के मुद्दे पर मिले जनादेश का भाजपा ने किया सम्मान गौरतलब हो कि 2014 में भाजपा को मिले जनादेश के पीछे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का प्रखर हिन्दुत्व का चेहरा ही थी। वहीं उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी लोगों ने हिन्दुत्व के नाम पर ही भाजपा को वोट किया है। योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशभर में ताबड़तोड़ रैलियां कर हिन्दुत्व के मुद्दे को प्रमुखता के साथ रखा।

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