मोदी लहर के बावजूद कई बाहुबली विस पहुंचने में कामयाब

लखनऊ, 11 मार्च । सूबे में विधानसभा चुनाव के नतीजों में मोदी लहर की आंधी ने विपक्षी दलों को पूरी तरह उखाड़ फेंका। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने सियासी इतिहास में सूबे में अभी तक की सबसे बड़ी जीत हासिल की है। हालांकि मोदी लहर के बावजूद कई बाहुबली और अपराधिक छवि वाले नेता विधानसभा में पहुंचने में सफल रहे। इनमें प्रतापगढ़ की कुण्डा विधानसभा से आरी चुनाव चिन्ह लेकर निर्दल मैदान में उतरे रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भईया जीत गये हैं। बाहुबली नेता की छवि रखने वाले राजा भईया के जीतने से राजधानी लखनऊ तक उनकी सीट के जीत पर चर्चा गरम है। राजा भईया ने भाजपा प्रत्याशी जानकी शरण पाण्डेय को हराया है। गोरखपुर की चिल्लूपार विधानसभा सीट पर बाहुबली नेता हरीशंकर तिवारी ने अपने पुत्र विनय शंकर तिवारी को अपनी हार का बदला लेने के उद्देश्य उतारा था। इस पूरे चुनाव का संचालन बाहुबली हरीशंकर तिवारी ही कर रहे थे। चिल्लूपार में भाजपा के प्रत्याशी राजेश त्रिपाठी की जीत के दावे हो रहे थे लेकिन शनिवार को जैसे ही मतगणना शुरू हुई चौथे ही राउण्ड में विनय शंकर तिवारी ने बढ़त बना ली और देर शाम तक एक सीट बहुजन समाज पार्टी की झोली में डाल दिया। इसी तरह आजमगढ़ सीट के फूलपुर पवई सीट पर बाहुबली नेता रमाकान्त यादव ने अपने पुत्र अरूण यादव को भाजपा के टिकट से मैदान में उतारा और अपने प्रतिद्वंदी अबुल कैश आजमी के खिलाफ चुनाव लड़ाया। अबुल कैश भी बसपा के टिकट से चुनाव मैदान में आ गया। दोनों पार्टियों भाजपा और बसपा से उतरे प्रत्याशियों ने जमकर प्रचार किया और इस लड़ाई में भाजपा प्रत्याशी अरूण यादव ने जीत हासिल की। जब अरूण यादव के पिता और बाहुबली रमाकान्त यादव ने अपने पुत्र को तिलक लगाकर जीत की बधाई दी। चंदौली जिले की सैयदराजा सीट पर बाहुबलियों ने अपना दमखम दिखाने का मन तैयार किया और एक साथ यहां तीन बाहुबली मैदान में आ गये। समाजवादी पार्टी से मनोज सिंह डब्लू, भाजपा से सुशील सिंह और बसपा से विनीत सिंह के बीच त्रिकोणीय मुकाबला हुआ और इसमें सुशील सिंह ने बसपा के विनीत सिंह को हराकर जीत हासिल की। सुशील सिंह एक बाहुबली नेता है और उनके चाचा माफिया डॉन बृजेश सिंह खुद भी वाराणसी से एमएलसी हैं। सैयदराजा सीट पर वर्ष 2012 का विधानसभा चुनाव लड़ने पर बृजेश सिंह को मुंह की खानी पड़ी थी, इस बार अपने हार का बदला भी उनके भतीजे सुशील सिंह ने ले लिया है। मऊ जिले की सदर सीट पर बाहुबल के दम पर चुनाव जीतते रहे मुख्तार अंसारी ने एक बार फिर से जीत हासिल कर ली है। समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी अल्ताफ अंसारी को सीधी टक्कर में मुख्तार अंसारी ने हरा दिया। मुख्तार इस बार बसपा के टिकट से चुनाव लड़ रहा था। वहीं मुख्तार अंसारी की अपनी पार्टी कौमी एकता दल के समर्थक भी उसके साथ मैदान में डटे रहे। इसके अलावा मुख्तार अंसारी का भाई सिबगातुल्लाह अंसारी बहुजन समाज पार्टी के टिकट से गाजीपुर जिले के मोहम्मदाबाद सीट से चुनाव लड़ कर हार गया है। वहां से भाजपा की प्रत्याशी अलका राय ने मुख्तार के भाई को हरा दिया है। अलका राय के पति स्वर्गीय कृष्णानन्द राय की हत्या का आरोप भी मुख्तार अंसारी पर है। इसी तरह पूर्व मंत्री और बाहुबली नेता अमरमणि त्रिपाठी का बेटा अमनमणि विधानसभा में पहुंचाने में सफल रहा। अमनमणि की जीत में उसकी दोनों बहनों का बड़ा हाथ रहा, जो भाई के जेल में होने के बावजूद बाहर उसका जमकर प्रचार करती रहीं। इनकी भावनाओं में जनता ऐसी बही कि भाजपा की नौतनवां सीट पऱ एक नहीं चली। अमनमणि अपनी पत्नी सारा की हत्या के आरोप में जेल में बन्द है। वहीं ज्ञानपुर से विजय मिश्रा भी विरोधियों की तमाम चक्रव्यूह रचना को भेदते हुए चुनाव जीतने में सफल रहे। 

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