मोटापे से 40 प्रतिशत बढ़े किडनी रोगी, स्कूली बच्चे भी गिरफ्त में

लखनऊ, 08 मार्च । जीवनशैली में बदलाव, व्यायाम न करने और मोटापे के कारण लोगों को किडनी खराब हो रही है। यहां तक कि मोटापे के कारण स्कूली बच्चे भी किडनी की बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं। फोर्टिस इंस्टीट्यूट के निदेशक नेफ्रोलाॅजी डाॅ. संजीव गुलाटी के अनुसार पिछले दशक में मोटापे के कारण 40 प्रतिशत किडनी मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। इसकी वजह से किडनी फेल्योर हो सकता है। डा. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के नेफ्रोलोजिस्ट डा. अभिलाष चन्द्रा ने बताया कि किडनी के खराब होने का आम लक्षण सूजन है। शरीर में पानी अधिक होने से सूजन हो जाती है और नमक अधिक होने से ब्लड प्रेशर हाई हो जाता है। इसके अलावा और भी कई काम जैसे खून बनाना, हड्डियों को मजबूत करना यानी विटामिन डी बनाना, ब्लडप्रेशर नियंत्रित करना और खराब तत्तवों को शरीर से बाहर निकालना जैसे काम किडनी करती है। किडनी की कई प्रमुख समस्याएं हैं, जिन्हें समझना जरूरी है। नेफ्रोटिक सिन्ड्रोम और उसके लक्षण नेफ्रोटिक सिन्ड्रोम में किडनी में जो फिल्टर हैं, उसके छिद्र बड़े हो जाते हैं, जिससे उन छेदों में से खराब तत्वों के साथ अच्छे आवश्यक तत्व भी बाहर निकल जाते हैं। सुबह चेहरे पर सूजन हो या शाम को काम से आने के बाद आपके पैरों पर सूजन हो तो यह किडनी की बीमारी के शुरूआती लक्षण हैं। इलाज इसके इलाज के लिए किडनी की बायोप्सी की जाती है उसे जांच कर पता लगाते हैं कि किस किस्म का न्यूट्रोटिक सिन्ड्रोम है। उसके अनुसार इलाज किया जाता है। सही तरह से इलाज करने पर यह बीमारी ठीक हो जाती है। अगर सूजन पर ध्यान न दिया जाय या इसका इलाज ना किया जाए तो धीरे धीरे किडनी फेलिअर हो जाता है। किडनी स्टोन (पथरी) व इसके लक्षण यह किडनी की दूसरी आम बीमारी है। इस बीमारी में पेशाब में कुछ तत्व व रसायन ज्यादा मात्रा में हो जाते हैं, वे पेशाब में घुले नहीं रहते है और जम कर स्टोन बन जाते हैं। कैल्शियम, फास्फोरस, यूरिक ऐसिड, सिस्टीन और कई अन्य तत्व स्टोन बनाते हैं। जब ये स्टोन बन जाते हैं तो यह धीरे धीरे बड़े होते जाते हैं और पेशाब के रास्ते को रोक देते हैं। इससे किडनी संक्रमण और फेलिअर का रिस्क बढ़ जाता हैं। किडनी स्टोन के लक्षण है पेशाब का रुकना, असहनीय तेज दर्द, पेशाब में खून आना, पेशाब में जलन होना, संक्रमण होना व दर्द के दौरान उल्टी भी हो सकती है। इलाज किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के यूरोलोजी विभाग के प्रो0 डा. विश्वजीत सिंह ने हिन्दुस्थान समाचार को बताया कि अगर स्टोन्स 5 मिमी से छोटे हैं तो वे पेशाब के जरिये अपने आप निकल जाते हैं व ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ती। दर्द बहुत ज्यादा है और बहुत खून आ रहा है, तब ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है। 10 मिमी से बड़े स्टोन अपने आप कभी भी नहीं निकल पाते अधिकतर उनका ऑपरेशन करना ही पड़ता है। सावधानी स्टोन न बने इसके लिए तीन से चार लीटर पानी पीना चाहिए। पानी की कमी से केमिकल कन्सन्ट्रेशन बढ़ जाता है और पानी अधिक होने से कन्सन्ट्रेशन कम होता है। पेशाब आने पर रोकना नहीं चाहिए। किडनी फेलिअर किडनी की सारी बीमारियां स्थाई नहीं होतीं, सही इलाज से खराब किडनी ठीक भी हो सकती है। किडनी फेलिअर का मतलब है किडनी अपना काम नहीं कर रही। इससे सूजन आ जाती है व ब्लडप्रेशर बढ़ जाता है। केमिकल्स जैसे यूरिया, क्रिएटिनाइन, पोटेशियम बढ़ने लगते हैं, तब पता चलता है कि किडनी काम नहीं कर रही है। आजकल किडनी फेलिअर के मुख्य कारण ब्लडप्रेशर, शुगर, पथरी व अधिक पेन किलर्स लेना है। इसलिए इनसे बचना बहुत जरूरी है। इन लक्षणों को नजरंदाज ने करें ऽ पैरो की सूजन ऽ पेशाब में जलन ऽ बार बार पेशाब आना ऽ पेशाब में खून का आना ऽ उल्टी आना हिन्दुस्थान समाचार/बृजनन्दन/राजेश/सुनीत

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