मिशन 2018; रमन-शिवराज की नीति से नहीं ,मोदी -शाह की नीति से लडा जायेगा चुनाव

 

 

अवधेश पुरोहित

भोपाल। । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमितशाह की टीम के द्वारा हाल ही में सम्पन्न हुए पाँच राज्यों के चुनाव में जिस तरह की नीति अपनाई गई और उस नीति के चलते उत्तराखंड और खासकर उत्तरप्रदेश में अन्य पार्टियों से आये विधायकों और उनके विजयी होने पर उत्तराखंड ओर यूपी के मंत्रिमण्डल में उन्हें मंत्री बनाने के बाद अब भाजपा इस रणनीति को मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में २०१८ में होने वाले विधानसभा चुनावों में अपनाने जा रही है और इस रणनीति की शुरुआत इस प्रदेश में प्रारंभ हो गई है, जिसके चलते इन राज्यों में सर्वे का काम जारी है जिसके चलते जीतने वाले विधायकों की खोज की जा रही है, फिर चाहे वह कांग्रेस के हों या समाजवादी पार्टी के या बहुजन समाज पार्टी के भाजपा नेताओं के अनुसार इस रणनीति के चलते प्रदेश में वर्तमान विधायकों में से अधिकांश विधायकों के टिकट कटना तय माना जा रहा है, तो वहीं इस रणनीति के चलते प्रदेश में चुनावी समर में उतारे जाने वाले विधायकों का चयन मध्यप्रदेश के शिवराज सिंह चौहान या संगठन की सहमति से नहीं किया जाएगा बल्कि जिन लोगों को मोदी और शाह की टीम उचित समझेगी उनको ही चुनावी समर में उतारा जाएगा इस रणनीति के चलते यह बात भी सामने आ रही है कि मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के होने वाले विधानसभा चुनाव छत्तीसगढ़ में रमन सिंह मध्यप्रदेश में शिवराज और राजस्थान में वसुंधरा राजे के नेतृत्व में नहीं बल्कि नरेन्द्र मोदी के चेहरे पर लड़ा जाएगा जो स्थानीय मुद्दों पर नहीं लड़ा जाएगा और राज्यों की सरकारों के कामकाज पर वोट नहीं मांगे जाएंगे बल्कि केन्द्र की सरकार के कामकाज पर वोट मांगे जाएंगे भाजपा नेताओं के अनुसार इस रणनीति के चलते राज्यों के मुख्यमंत्री के नेतृत्व में चुनाव नहीं लड़ा जाएगा बल्कि मुख्यमंत्री का चयन यूपी की तरह विधायक दल की बैठक में चयन किया जाएगा । मोदी और शाह की टीम की रणनीति क ो यूपी की चुनाव की सफलता का प्रयोग अब मप्र में भी होगा इसी रणनीति के चलते भाजपा मिशन २०१८ का चुनाव शिवराज सिंह के नेतृत्व में नहीं लड़ा जाएगा इस बात की पुष्टि भाजपा के कई नेता करते नजर आ रहे हैं इन नेताओं के अनुसार तीनों राज्यों के अगले साल के अंत में होनेवाले चुनाव अब इन प्रदेशों में राष्ट्रपति शासन लागू करके २०१९ के मई तक टाला जा सकता है और इन तीनों राज्यों के चुनाव लोकसभा के चुनावों के साथ कराये जाएंगे कुल मिलाकर मोदी-शाह की रणनीति इन चुनावों को मोदी के नाम पर लड़े जाने की चर्चा जोरों पर है। ऐसी स्थिति में भाजपा को किसी भी प्रादेशिक क्षत्रप की जरूरत नहीं पड़ेगी। कुल मिलाकर भाजपा मप्र छत्तीसगढ़ और राजस्थान के होने वाले विधानसभा चुनाव में यूपी में अपनाई गई रणनीति को अपनाकर इन तीनों प्रदेश के चुनाव शिवराज, रमन या वसुंधरा के नाम पर नहीं बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर लड़े जाने की संभावनायें व्यक्त करते भाजपाई नेता नजर आ रहे हैं। इस रणनीति के तहत तीनों प्रदेशों के चुनाव लड़े गए तो ऐसी भी संभावना व्यक्त की जा रही है कि इन विधानसभा चुनाव से पूर्व इन तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को बदलकर कोई नये नेता का चयन होगा, ऐसी भी संभावनायें प्रबल होती नजर आ रही हैं तो वहीं भाजपा के कुछ नेता यह भी कहते नजर आ रहे हैं कि मिशन-२०१८ के चुनाव के बाद इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों का बदलना तय है क्योंकि मोदी-शाह की टीम की रणनीति के चलते अब इन तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के चहेते लोगों को इन राज्यों में होने वाले चुनावी समर में कम ही उतारा जाएगा ताकि उनका गुट यहां इन राज्यों में हावी न हो सके और भाजपा यहां आसानी से नेतृत्व परिवर्तन की रणनीति को साकार करने में सफलता प्राप्त कर सके। इन तीनों राज्यों मेें मोदी-शाह की टीम अपनी रणनीति को लागू कर सके।

Shares