मायावती ने की सपा-बसपा गठबंधन की घोषणा, दोनों 38-38 सीटों पर लड़ेगी चुनाव

मायावती ने की सपा-बसपा गठबंधन की घोषणा, दोनों 38-38 सीटों पर लड़ेगी चुनाव

लखनऊ। लोकसभा चुनाव से पहले सपा और बसपा ने बड़ा फैसला लेते हुए गठबंधन की घोषणा कर दी है। शनिवार को लखनऊ के ताज होटल में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा चीफ मायावती ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए उसकी घोषणा की। हालांकि, इस गठबंधन से दोनों दलों ने कांग्रेस को दूर ही रखा है।

बसपा प्रमुख मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि हमने आने वाले लोकसभा चुनाव में एक साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। हमने यह फैसला 25 साल पहले राज्य में हुए गेस्ट हाउस कांड को भूलते हुए लिया है। इस गठबंधन के बाद सपा और बसपा दोनों ही 80 में से 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। वहीं रायबरेली और अमेठी की दो सीटें कांग्रेस के लिए छोड़ दी गईं हैं।

Mayawati: BSP will contest on 38 seats, SP on 38 seats. Two Lok Sabha seats we have left for other parties and Amethi and Rae Bareli have been left for Congress. pic.twitter.com/lsdCdxKNah

— ANI (@ANI) January 12, 2019

मायावती ने कहा कि यह गठबंधन भाजपा एंड कंपनी को रोकने के लिए जनहित में किया गया है। इसमें कांग्रेस शामिल नहीं है। कांग्रेस के लिए सीट छोड़ने से वोट नहीं बढ़ता। भाजपा और कांग्रेस की नीतियां एक जैसी ही हैं। दोनों ने देश पर राज किया है और दोनों एक सी नीतियों पर चलते हैं। कांग्रेस ने देश में इमरजेंसी लगाई वहीं भाजपा के राज में भी अघोषित इमरजेंसी जैसे हालात है।

इस बड़े मौके को लेकर लखनऊ की मुख्य सड़कें अखिलेश और मायावती के पोस्टरों के अलावा दोनों दलों के झंडों से सज गईं हैं।

BSP Chief Mayawati: Moreover, we won’t gain anything by including Congress in our alliance. Both BSP and SP have experienced in the past that Congress’s vote is not transferrable https://t.co/u0OqPeNMli

— ANI (@ANI) January 12, 2019

भाजपा के विजय रथ को रोकने के लिए एक बार फिर दो बड़ी राजनीतिक पार्टियों ने गठबंधन किया है। दो वर्ष पूर्व विधानसभा चुनाव से पहले राजधानी लखनऊ के पांच सितारा ताज होटल में अखिलेश यादव और राहुल गांधी ने “यूपी के लड़के” और “यूपी को यह साथ पसंद है” नारे के साथ चुनावी गठजोड़ किया था। सपा का तकरीबन ढाई दशक पहले बसपा से गठबंधन करने का फार्मूले हिट रहा था।

वहीं अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा के घमंड को तोड़ने के लिए यह जरूरी था की सपा और बसपा साथ आएं। भाजपा हमारे कार्यकर्ताओं के बीच मतभेद पैदा करने के लिए किसी भी स्तर तक जा सकती है लेकिन हमें साथ रहना होगा।

इस घोषणा के साथ ही प्रदेश की राजनीति में धुर विरोधी माने जाने वाले सपा-बसपा का ढाई दशक बाद एक मंच पर आए हैं जो सूबे की सियासत का बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।

1993 जैसे करिश्मे की आस

नब्बे के दशक में राम लहर पर बेक्र लगाने का काम भी सपा-बसपा गठबंधन ने किया था। तब बसपा के संस्थापक कांशीराम और सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने मिलकर 1993 में विधानसभा चुनाव लड़ा था। बाबरी ढांचा गिरने के बाद भाजपा का सत्ता में वापसी का ख्वाब भी टूट गया था। अब 25 वर्ष बाद मुलायम सिंह के बेटे अखिलेश यादव और कांशीराम की उत्तराधिकारी मायावती एक बार फिर से भाजपा को रोकने के लिए एका कर रहे हैं

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