महिला सशक्तिकरण के लिए समाज और सरकार दोनों मिलकर काम करें : शिवराज

भोपाल, 08 मार्च । अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर बुधवार को राजधानी भोपाल स्थित विधानसभा में मातृशक्ति को समर्पित भव्य कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि समाज और सरकार दोनों को महिला सशक्तिकरण के लिए काम करना होगा। भारत में बेटियों, बहनों और माताओं को सर्वोच्च सम्मान दिया गया है। नारी का सम्मान करना भारत की संस्कृति है। केवल एक दिन महिला दिवस को मनाने से बेहतर है हर दिन महिलाओं के सम्मान को समर्पित होना चाहिए। उन्होंने महिला दिवस पर माताओं, बहनों, बेटियों को शुभकामनाएँ दी। चौहान ने कहा कि आज भी समाज पुरूष प्रधान है। उन्होंने कहा कि पुरूष प्रधान समाज में महिलाओं की स्थिति बेहतर बनाने के लिये महिलाओं को हर क्षेत्र में नेतृत्व देना जरूरी है। उन्हें स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया हैं। आज वे पूरी दक्षता से प्रशासन चला रही है। पुलिस विभाग सहित अन्य सरकारी नौकरियों में 33 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। उन्होंने कहा कि बेटों का जन्म चाहने की मानसिकता बदलने की जरूरत है। चौहान ने कहा कि पुरूष प्रधान मानसिकता महिलाओं की स्थिति को गहरे प्रभावित करती है। यदि समाज साथ नहीं दे तो सरकार कुछ नहीं कर सकती। समाज की मानसिकता बदलने की जरूरत है। महिलाओं के विरूद्ध घरेलू हिंसा रोकने के लिये सबको सहयोग करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बेटियों के साथ दुराचार करने वालों को फाँसी देना चाहिए। बेटियों को मान-सम्मान देने में कोई कोताही नहीं होगी। समाज की मानसिकता बदलने का काम करने की जिम्मेदारी सभ्य पढ़े-लिखे जिम्मेदार नागरिकों की भी है। मुख्यमंत्री ने नशे को अपराधों की जड़ बताते हुए कहा कि केवल कानून बना कर नशामुक्ति नहीं हो सकती। सबको धीरे-धीरे संकल्पबद्ध होना होगा तभी प्रदेश पूरी तरह नशामुक्त होगा। सरकार और समाज दोनों को साथ-साथ चलना होगा। राज्य सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए पूर्णता प्रतिबद्ध है। विधान सभा अध्यक्ष सीतासरण शर्मा ने वैश्विक परिदृश्य की चर्चा करते हुए कहा कि बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ भारत की संस्कृति को पहचानने और बचाने की पहल है। महिला-बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनिस ने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश में बेटियों के लिये कई अनूठी योजनाएँ शुरू की गई हैं। उन्होंने बेटियों और माताओं की ओर से मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि घर-परिवार सम्हालने वाली महिलाओं का वित्तीय योगदान भारत सरकार के सालाना बजट से कहीं ज्यादा है। उन्होंने कहा कि सभी जिलों में महिला रोजगार मेलों का आयोजन किया जाएगा। भोपाल से शुरूआत हो रही है। उन्होंने कहा कि हर गाँव में पोषण आहार उपलब्ध कराने के लिए महिला-बाल विकास विभाग, कृषि विभाग के साथ मिलकर काम करेगा। उन्होंने कहा कि रक्षा-बंधन पर सभी भाई अपनी बहनों को नशा नहीं करने का वचन देकर नशामुक्ति की शुरूआत करें। मुख्यमंत्री ने “जाग सखी” पुस्तिका, ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ के ब्रोशर और पोषण कैलेण्डर का विमोचन किया। अतिथियों को प्रतीक स्वरूप पोषण किट प्रदान किया गया। इस अवसर पर महिलाओं, बच्चों को उत्पीडऩ से बचाने के प्रयास के लिये दिया जाने वाला एक लाख रूपये का रानी अवंतीबाई वीरता पुरस्कार ग्वालियर की सुश्री अभिरूचि श्रीवास्तव को दिया गया। महिलाओं के स्वास्थ्य संवर्धन से जुडे मुद्दों पर विशेष योगदान के लिये एक लाख रूपये का विष्णु कुमार महिला एवं बाल कल्याण पुरस्कार होशंगाबाद के डॉ. यू.के. शुक्ला को प्रदान किया गया। सतना के मास्टर अक्षत झा को बेटियों को बचाने के प्रयासों पर आधारित फिल्म बनाने के लिये सम्मानित किया गया। इस अवसर पर लिंगानुपात सुधारने के लिये विशेष प्रयास करने और उपलब्धि हासिल करने वाले जिलों के कलेक्टरों और आयुक्तों को भी सम्मानित किया गया । एक लाख रूपये का प्रथम पुरस्कार मुरैना जिले को, 60 हजार रुपये का द्वितीय पुरस्कार ग्वालियर को और 30 हजार रूपये का तृतीय पुरस्कार बालाघाट को दिया गया। ‘बेटी बचाओ बेटी-पढ़ाओ’ पर सांगीतिक रचना के लिये गुना जिले की सुचिता व्यास को भी सम्मानित किया गया। प्रमुख सचिव महिला-बाल विकास जे. एन. कंसोटिया ने महिलाओं की स्थिति की चर्चा की। आयुक्त महिला सशक्तिकरण जयश्री कियावत ने आभार माना। इस अवसर पर विधानसभा उपाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री ललिता यादव और नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह उपस्थित थे। हिन्दुस्थान समाचार/मयंक/मुकेश/प्रतीक

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