भोपाल:24घंटे नर्मदा हॉस्पिटल में डेड बॉडी का इलाज

भोपाल
अपने कारनामों के लिए बदनाम हो चुके अरेरा कॉलोनी स्थित नर्मदा हॉस्पिटल एवं ट्रामा सेंटर का एक नया कारनामा सामने आ गया है। दरअसल इस अस्पताल ने बिल बढ़ाने के लिए 24 घंटे तक डेड बॉडी का इलाज किया। इसकी पोल तब खुली जब एक डॉक्टर ने मरीज के परिजनों से कहा कि आपके मरीज की मौत हो चुकी है। घरवालों को बुला लीजिए। जब घरवाले डेडबॉडी लेने आ गए तो डायरेक्टर डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि मरीज की अभी धड़कनें चल रही हैं। इस दौरान इंग्लिश में लिखे कुछ कागजों पर परिजनों के हस्ताक्षर कराए। इसके बाद एक बार फिर 12 घंटे बाद बताया कि आपके मरीज की मौत हो गई। परिजनों को आशंका है कि मौत 24 घंटे पहले ही हो चुकी थी।
मौत के बाद भी मांगे 30 हजार रुपए
रघुनाथ की मौसी के लड़के अशोक कुमार ने बताया कि नर्मदा अस्पताल ने मरीज की मौत के बाद भी 30 हजार रुपए की डिमांड कर दी। जब परिजनों ने सख्ती दिखाई कि आप मौत के बाद किस बात के पैसे मांग रहे हैं तब उनके पास कोई जवाब नहीं था। पहले तो अस्पताल ने जबरदस्ती की लेकिन जब परिजनों ने कहा कि हम शिकायत करेंगे तो 30 हजार नहीं मांगे और शव को जाने दिया। अशोक ने बताया कि हम पहले ही 8 दिन के ढाई लाख रुपए अदा कर चुके हैं, इसके बावजूद भी पैसों की डिमांड क्यों की गई। अशोक ने आशंका जताई कि रघुनाथ भैया की मौत शायद पहले ही हो चुकी थी, तभी हम लोग को आईसीयू में नहीं जाने दिया गया। पैसे के लालच में डाक्टर्स शव का इलाज करते रहे।
इस तरह नर्मदा के शिकंजे में फंसा मरीज
5 जनवरी को मंडीदीप से औबेदुल्लागंज आते वक्त सड़क दुर्घटना में नूरगंज निवासी रघुनाथ सेहरिया गंभीर रूप से घायल हो गए थे। जिन्हें नर्मदा अस्पताल मेें भर्ती कराया गया। 5 जनवरी से रघुनाथ को लगातार वेंटिलेटर पर रखा गया लेकिन 9 जनवरी के बाद किसी परिजन को आईसीयू में नहीं जाने दिया गया। इसके बाद 10 जनवरी को सुबह नर्मदा के एक डॉक्टर ने मरीज के परिजनों को बताया कि रघुनाथ की मौत हो चुकी है। इस सूचना पर परिजनों ने नूरगंज से अन्य रिश्तेदारों को भी बुला लिया। थोड़ी देर बाद अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. राजेश शर्मा आ गए। उन्होंने रघुनाथ के परिजनों को ढांढस बंधाया और कहा कि रोने की बात नहीं अभी रघुनाथ की धड़कनें चल रही हैं। यह सुनकर मरीज के परिजन वापस चले गए। अब 11 जनवरी को डॉक्टर ने फिर बताया कि रघुनाथ की डेथ हो गई। इसके बाद फिर परिजनों को बुलाया गया और 12 जनवरी की सुबह वह डेडबॉडी लेकर नूरगंज के लिए रवाना हो गए। यह सब नर्मदा हॉस्पिटल ने सिर्फ पैसे के लिए किया।

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