भोपाल विज्ञान मेला : 11 फरवरी 2018 मोबाइल प्लेनेटेरियम और न्यूक्लियर पॉवर के मंडप में दर्शकों की उमड़ी भीड़

 

भोपाल : 11

विज्ञान मेले के तीसरे दिन 11 फरवरी,रविवार को दोपहर में अचानक मौसम में बदलाव के बावजूद विद्यार्थियों की अच्छी भीड़ थी। प्रवेश द्वार के निकट के पेवेलियन में इंदौर के चिल्ड्रन साइंस सेंटर द्वारा लगाये गये मोबाइल प्लेनेटेरियम में बच्चों को आकाश गंगा,तारों सहित खगोल विज्ञान की दिलचस्प जानकारियां मिलीं। विज्ञान प्रसार दिल्ली से जुड़े और राज्य समन्वयक राजेंद्र सिंह ने बताया कि अस्थायी डोम में लगभग 20मिनट के कार्यक्रम को बड़ी संख्या में आम लोगों ने देखा। पूरे दिन विद्यार्थियों के साथ आम लोगों की भीड़ लगी  राजेंद्र सिंह ने बताया कि उन्हें इसी वर्ष 2-5 फरवरी तक राजगढ़ विज्ञान मेले में बहुत अच्छा प्रतिसाद मिला।

न्यूक्लियर पॉवर कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) की इंटरएक्टिव गैलरी में जानकारियों से भरपूर प्रादर्श (एक्जीबिट) को देखने के बाद दर्शकों को पहली बार न्यूक्लियर इनर्जी के विभिन्न फायदों,सुरक्षा उपायों और भारत के न्यूक्लियर कार्यक्रम के बारे में पहली बार पता चला। इस संस्थान के विभिन्न प्रकाशनों में शिक्षकों और विद्यार्थियों ने विशेष रुचि दिखाई। विशेषज्ञों की टीम ने बताया कि पिछले वर्ष डेढ लाख लोगों ने उनके पेवेलियन का अवलोकन किया था।

विशेष व्याख्यान

आज प्रात : सत्र में पद्मविभूषण श्री चण्डी प्रसाद भट्ट ने हिमालय की संवेदनशीलता एवं वर्तमान संकट पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वास्तव में हिमालय जलवायु परिवर्तन का नियंत्रक है। मनुष्य का आदिकाल से हिमालय से रिश्ता रहा है। यहां परंपरागत रूप से प्र.ति का संरक्षण हुआ है। उन्होंने कहा कि हिमनद पिघल रहे हैं। स्थानीय तापमान बढ़ रहा है।

श्री भटट ने कहा कि तथाकथित विकास के लिए बाजारवाद का दबाव बढ़ रहा है। हिमालय में कई प्रकार के औषधीय वनस्पतियां हैं। अब इन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। उन्होंने चिपको आंदोलन के अनुभव भी साझा किये।

सीएसआईआर-एम्प्री के निदेशक डॉ.अविनाश कुमार श्रीवास्तव ने  नैना पदार्थों पर व्याख्यान देते हुए कहा कि इस नन्ही तकनीक ने औषधि निर्माण के क्षेत्र में नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त किया है। उन्होंने बताया कि परमाणु के स्तर पर पदार्थ में किये जाने वाले हस्तक्षेप को नैनो तकनीक कहते हैं। नैनो तकनीक का प्रतिरक्षा और इनर्जी के क्षेत्र में भी उपयोग हो रहा है। भारत में सीएसआईआर सहित कई संस्थानों में नैना टैक्नोलॉजी पर रिसर्च हो रही है।

विज्ञान मेले में 12 फरवरी को

जेएनयू के कुलपति प्रो.एम.जगदीश कुमार का 12फरवरी को दोपहर 12.00-01.00 बजे व्याख्यान आयोजित किया गया है। चार-दिवसीय मेले का समापन सोमवार को होगा।

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