भोपाल: निजी स्कूलों में बचपन से खिलवाड़, लूट-खसोट जारी

भोपाल, 27 मार्च । पिछले तीन वर्षों से लेकर अब तक मध्यप्रदेश के सभी छोटे-बड़े शहरों में प्ले-स्कूलों और पांच सितारा निजी स्कूलों की बाढ़ आ गई है, यहां तक कि गली-मोहल्ले में स्कूल खुल गए हैं। इन स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के न तो पुख्ता प्रबंध हैं और न ही खेलने-कूदने के इंतजाम। कुछ जगह तो दो-तीन कमरों और बहुमंजिला इमारतों में ये स्कूल संचालित हो रहे हैं। कुछ निजी स्कूलों को छोड़ दें, तो शासन ने प्ले-स्कूलों की मॉनीटरिंग की कोई व्यवस्था नहीं की है और न ही इनके लिए कोई गाइड लाइन तय की है। यही वजह है कि स्कूल संचालक अभिभावकों से मनमानी फीस वसूल रहे हैं। प्ले स्कूलों में स्टाफ की नियुक्ति के भी कोई मापदंड नहीं हैं। साथ ही उनका पुलिस वेरिफिकेशन भी नहीं कराया जाता है। प्ले-स्कूलों का कहीं भी रजिस्ट्रेशन न होने से बाल आयोग ने इसे गैरकानूनी करार दिया है। वहीं, अन्य स्कूलों के लिए शासन-प्रशासन ने गाइडलाइन तो बनाई है, इसके बावजूद इनमें जमकर लूट-खसोट हो रही है। कुछ समय पहले केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने प्ले-स्कूलों को लेकर मिल रही शिकायतों के संबंध में पहल की थी। मंत्रालय ने ‘नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट’ को निर्देश दिए थे। साथ ही स्कूलों के लिए गाइड लाइन बनाने को कहा था। इस गाइड लाइन के बाद सभी प्ले-स्कूलों को सरकार के पास रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इससे ये स्कूल कानून के दायरे में आ जाएंगे। गाइड लाइन का पालन न करने पर इनका पंजीयन निरस्त कर स्कूल संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कहीं-कहीं तो ऐसे स्कूल केवल एक-दो कमरों में संचालित हो रहे हैं। स्टाफ की योग्यता को लेकर मापदंड ही निर्धारित नहींं। बच्चों के खेलने-कूदने के लिए पर्याप्त जगह नहीं होती। कुछ स्कूल तो बहुमंजिला इमारतों में संचालित हो रहे हैं। स्कूलों में तैनात गार्ड और अन्य स्टाफ का पुलिस वेरिफिकेशन नहीं होता है। 

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