भोपाल: निजी स्कूलों की किताबें 25 प्रतिशत महंगी, लुट रहे अभिभावक

  भोपाल  /जबलपुर, 07 मार्च । किताबों के नाम पर शहर के निजी स्कूलों ने इस साल भी लूट मचानी शुरू कर दी है। अभिभावकों के किताबें इतनी महंगी हैं कि खरीदने में पसीने छूट रहे हैं। अभिभावकों के मुताबिक इस बार किताबें 25 प्रतिशत तक महंगी हैं। पिछले साल कोर्स मटेरियल करीब तीन हजार रुपए का आया था, अब चार हजार रुपए का आ रहा है। कमीशन का खेल ऐसा कि पहले से तय विक्रेताओं के यहां ही कोर्स उपलब्ध हैं। अधिकांश प्राइवेट स्कूल की तीसरी का कोर्स 4033 रुपए का है। स्केच बुक सहित कुल 16 किताबें बच्चों को पढऩी होंगी। कमोबेश यही स्थिति दूसरी और चौथी की भी है। हालांकि, स्कूल ने किताबों की सूची नोटिस बोर्ड पर चस्पा की है, लेकिन ये किताबें बाजार में उपलब्ध नहीं हैं। एक अभिभावक ने बताया कि उनके दो बेटे हैं, इनका कोर्स करीब नौ हजार रुपए का पड़ा। घर का पूरा बजट ही गड़बड़ा गया। शहर के ज्यादातर स्कूल 20 मार्च तक खुल रहे हैं।एक निजी स्कूल संचालक ने बताया कि प्राइवेट पब्लिशर स्कूलों को उनकी किताबें चलाने के लिए 30 प्रतिशत तक कमीशन देते हैं। इस तरह अगर 400 रुपए की किताब है तो सीधे-सीधे इस पर करीब 120 रुपए स्कूल के खाते में जाते हैं। बड़े स्कूलों में छात्र संख्या ज्यादा होती है, इसलिए पब्लिशर ज्यादा कमीशन ऑफर करते हैं। छात्र संख्या के हिसाब से स्कूलों को एकमुश्त राशि दे दी जाती है। पब्लिशर शहर में एक या दो बुक डीलर्स के यहां अपनी किताबें उपलब्ध करवा देते हैं और इन्हीं के यहां किताबें मिल पाती हैं। ऐसे में लाखों रुपए का खेल होता है। कई बार स्कूल सेमिनार या अन्य कोई कार्य पब्लिशर से करवा लेते हैं और पैसा नहीं लेते।स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी हर साल बस्ते का बोझ कम करने की बात करते हैं, लेकिन स्थिति इसके उलट है। प्राइमरी तक के छात्रों को ही करीब डेढ़ दर्जन किताबें लेनी पड़ रही हैं। कई किताबें साढ़े 300 रुपए की हैं। नौवीं कक्षा की किताब 600 रुपए की है। अभिभावक प्रमोद कुमार बताते हैं कि इतनी किताबों का कोई मतलब नहीं है। कुछ किताबें तो साल में एकाध बार ही पढ़ाई जाती है।

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