भोपाल :कर्मचारियों का गुस्सा फूटा, मुख्यमंत्री ने बुलवाया

 

 

भोपाल, ब्यूरो। बसों और स्कूल वैन में नियमों का पालन कराने को लेकर बस व वैन संचालकों द्वारा की गई हड़ताल से आज हजारों बच्चे समय पर स्कूल नहीं पहुंच सके। उधर, कर्मचारियों के प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चर्चा के लिए उन्हें शाम 6 बजे आमंत्रित किया है।

आज कई अभिभावकों ने खुद स्कूल जाकर बच्चों को छोड़ा तो कुछ ने बच्चों को स्कूल ही नहीं भेजा।  इसके चलते कई स्कूलों के सामने जाम की स्थिति भी बनी। वहीं कुछ जिलों में बच्चों के पेपर समय पर गाड़ियां नहीं मिलने से छूट गए। दूसरी ओर प्रशासन के अफसरों ने स्कूल बसों व वैन की जांच भी आज की।  इधर सरकार की अनसुनी से परेशान 4 कर्मचारी संगठनों के नेताओं ने आज से मंत्रालय के सामने भूख हड़ताल शुरू कर दी है। इनके समर्थन में राजधानी के विभागाध्यक्ष कार्यालयों के हजारों कर्मचारियों ने काम का बहिष्कार किया। दूसरी ओर, नर्सेस एसोसिएशन ने भी सरकार के विरुद्ध आंदोलन का आगाज कर दिया है।

 

मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन
प्रदेश के चार कर्मचारी संगठनों मंत्रालय कर्मचारी संघ, तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ, लिपिक वर्गीय कर्मचारी संघ एवं लघुवेतन कर्मचारी संघ के कर्मचारी नेता ने अपनी मांगों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया है। मंत्रालय के के गेट नम्बर एक के सामने ये तीन दिवसीय भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। इस हड़ताल से राजधानी के विभागाध्यक्ष कार्यालयों के कामकाज पर असर पड़ रहा है।

ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर में हड़ताल पर नर्सेस
मप्र नर्सेस एसोसिएशन की अध्यक्ष रेखा परमार ने बताया कि सरकार मेडिकल कालेज और आटोनामस बाडी मे काम करने वाली नर्सेस की अनदेखी कर रही है। इनके अस्पतालों में काम करने वालों के करोड़ों रुपए सीआरएफ के नाम पर काटे जा चुके हैं पर यह राशि वर्ष 2007 से दी नहीं जा रही है। एसोसिएशन की यह भी मांग है कि 3-4 इंक्रीमेंट मेडिकल कालेज में पदस्थ नर्सेस को दिया जाए। सातवां वेतनमान और समय मान वेतनमान दिया जाए। अनिश्चितकालीन हड़ताल ग्वालियर, इंदौर और जबलपुर में हो रही है।

ये है कर्मचारियों की मांगें
इनकी मांग है कि कर्मचारियों को पदोन्नति, सेवानिवृत्ति की आयु 60 से बढ़ाकर 62 साल करने, प्रोफेशनल टैक्स समाप्त करने, लिपिकों, अनुभाग अधिकारियों, व निज सचिवों एवं अन्य संवर्गों की वेतन विसंगति दूर करने, भृत्य व जमादार का पदनाम बदलने समेत अन्य मांगों पर सरकार कार्यवाही करे। हालांकि कर्मचारियों का एक गुट इसका विरोध भी कर रहा है।

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