भेल दशहरा मैदान पर भोपाल विज्ञान मेले-2018 का शुभारंभ

 

 

 

भोपाल। नए वैज्ञानिक प्रयोग और विज्ञान विषय के प्रति युवाओं का उत्साह शुक्रवार को देखने मिला। भेल दशहरा मैदान पर सातवें भोपाल विज्ञान मेले-2018 का शुभारंभ हुआ। जहां हर कोई विज्ञान के नए प्रयोगों को जानने के लिए उत्सुक था। शुभारंभ मौके पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि ऐसे आयोजनों के जरिए लोगों को एक-दूसरे के विचार जानने-समझने का मौका मिलता है। भारतीय शास्त्रों में वैज्ञानिक अवधारणाएं निहित हैं। महात्मा गांधी ने स्वदेशी विज्ञान पर काफी जोर दिया था।

हेलमेट का वैज्ञानिक प्रयोगः

इंजीनियरिंग स्टूडेंट अमित कुमार सिंह बताते हैं कि हमने तीन माह से मॉडल्स बनाने की तैयारी में लगे थे। हमारी टीम ने स्मार्ट हेलमेट बनाया है। यह हेलमेट के साथ वायरलेस अटैच किया गया है। बाइक के साथ भी अटैच है। हेलमेट गाड़ी की स्पीड को कंट्रोल करता है। यदि गाड़ी की स्पीड ज्यादा तेज हो जाती है तो डिवाइस इसे कम करती है। गाड़ी की गति तेज होने पर डिवाइस गाड़ी के इंजन को बंद भी कर देती है। इससे दुर्घटना की संभावनाओं को रोका जा सकता है। टीम में अभिषेक, अनुराग, ब्रजेश ने भी सहयोग किया।

बनाया स्मार्ट डस्टबिनः

इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स विशाल कुमार झा और विशाल उमप बताते हैं कि हमने स्मार्ट डस्ट बिन बनाया है। इसे बनाने में एक महीने का समय लगा। जब लोग इसके आसपास होते हैं तो यह ऑटोमेटिक ओपन हो जाता है। यह ऑटोमेटिक क्लोज भी हो जाएगा। यह फुल होने पर फोन के जरिए सूचना भी देता है। इसमें एवीआर माइक्रो कंट्रोलर, अल्ट्रोसोनिक सेंसर लगा है। इसका उपयोग हम कर्मशियली और डोमेस्टिक रूप में भी कर सकते हैं।

मिली रियटर से जुड़ी जानकारियां:

मेले में निजी संस्थानों की वैज्ञानिक उपलब्धियों और कार्यक्रमों की प्रदर्शनी लगाई गई। यहां खास आकर्षण वैज्ञानिक मॉडलों के साथ-साथ ब्रह्मेस का था। प्रदर्शनी में बताया गया कि देश में कोयला आधारित परियोजनाओं से बिजली उत्पादन किया जाता था, लेकिन यह खर्चीली होने के साथ ही पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक होती है। देश की ऊर्जा और बिजली आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए न्यूलियर पावर प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। पहले रूस- अमेरिका और विकसित देशों की मदद से परमाणु रिएटर तैयार किए जाते थे। अब देश में ही इसका निर्माण होने लगा है। देश अपनी ऊर्जा से जुड़ी जरूरतों को ध्यान में रख रहा है। परणाणु रिएटर से जुड़ी कई बातें मेले में जानीं।

ब्रह्ममोस मिसाइल का आकर्षणः

मेले में न्यूलियर पॉवर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की प्रदर्शनी भी लगाई गई। स्टूडेंट्स ने मेले में रिएटर मॉडल और कार्यप्रणाली को भी समझा। मेला में आई ब्रह्ममोस मिसाइल देख सभी उत्साहित हो उठे। प्रदर्शनी में निजी संस्थानों के प्रयोग और वैज्ञानिकों की उपलधियां बताई गईं। एनटीपीसी, एनपीसीआईएल समेत सौ से ज्यादा संस्थानों को शामिल किया गया।

अतिथियों ने रखे विचारः

कार्यक्रम में मौजूद सचिव जयंत सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि ऐसे आयोजनों से स्वदेशी वैज्ञानिक तकनीकों और आविष्कारों की जानकारी समाज तक पहुंचाई जा सकती है। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव विज्ञान और प्रौद्योगिकी मनु श्रीवास्त्व, मप्र विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद महानिदेशक डॉ. नवीन चंद्रा मौजूद थे।

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