भारत-बांग्लादेश ने म्यांमार से कहा रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस बुलाए

ढाका। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज दो दिनों के बांग्लादेश दौरे पर पहुंचीं हैं। रविवार को भारत और बांग्लादेश ने रविवार को आंतकवाद पर गहन चर्चा की और फैसला लिया कि समाज को विघटनकारी, नस्ली व आतंकी हमलों से बचाने के लिए दोनों देश मिलकर काम करेंगे।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज बांग्लादेश की दो दिवसीय यात्रा पर रविवार को यहां पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने कि बांग्लादेश को आठ अरब डॉलर का ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। भारत ने इतनी बड़ी सहायता राशि अब तक किसी देश को नहीं दी है। इस दौरान दोनों देशों ने संयुक्त बयान में म्यांमार से कहा कि रोहिंग्या शरणार्थियों को वह वापस बुलाए।

विदेश मंत्री स्वराज ने बांग्लादेश के विदेश मंत्री एएच महमूद अली के साथ भारत-बांग्लादेश की संयुक्त सलाहकार समिति की बैठक की सह-अध्यक्षता की। बैठक में द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की गई। उन्होंने कहा कि भारत अपने पड़ोसी देश को 660 मेगावॉट बिजली की आपूर्ति कर रहा है। भविष्य में यह दोगुनी की जा सकती है।

अंतरराष्ट्रीय सौर ऊर्जा समझौते में भी दोनों देश मिलकर काम करेंगे। दोनों देश सिलीगुड़ी से बांग्लादेश के पार्बतीपुर के बीच पेट्रोलियम पाइपलाइन का निर्माण करने को सहमत हुए हैं। उनका कहना है कि ढाका-मैत्री एक्सप्रेस के फेरे बढ़ाने के साथ संपर्क मजबूत करने के अन्य मसलों पर भी भारत विचार कर रहा है।

विदेश मंत्री ने कहा कि बांग्लादेश के स्वतंत्रता सेनानियों को बहु प्रवेश वीसा देने के साथ उनके इलाज के लिए भारत में सुविधा उपलब्ध कराने पर भी विचार किया जा रहा है।

दो दिनी प्रवास में सुषमा स्वराज बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना को 1971 के युद्ध से जुड़ी कुछ ऐतिहासिक धरोहर भी सौंपेंगी।

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