भाजपा नेतृत्व का ताजा फैसला : अब तीनों पूर्व मुख़्यमंत्रियों को वापस दिल्ली बुलाया

भाजपा नेतृत्व का ताजा फैसला : अब तीनों पूर्व मुख़्यमंत्रियों को वापस दिल्ली बुलाया
आज से दिल्ली में भाजपा की राष्ट्रीय परिषद का सम्मेलन शुरू होने जा रहा है।2019 के लोकसभा चुनाव से पहले यह पार्टी का शायद सबसे बड़ा सांगठनिक आयोजन है।इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री ,राष्ट्रीय अध्यक्ष और संगठन – सरकार के मंत्रीगण पूरे समय रहनेवाले हैं। विशेषकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पूरे समय अपने कार्यकर्ताओं के लिए परिसर में ही उपलब्ध रहेंगे।जाहिर है यह सम्मेलन भाजपा के भविष्य के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण आयोजन है।
इसमें सभी राष्ट्रगत, नीतिगत, व्यक्तिगत और संगठन गत निर्णय होनेवाले हैं।पूरा देश ही नहीं,समूचा विश्व इसे उत्कंठा से देखेगा और इसे भारत के भावी भविष्य के रूप में परखेगा भी,तदनुसार अपनी नीतियों में परिवर्तन करेगा।
पार्षद सम्मेलन शुरू हो ,उसके अधिकांश गणमान्य प्रतिभागी जब मार्ग में होंगे तब एक बहुत बड़ा निर्णय उन्हें चौकायेगा अवश्य,कि अभी हाल में जिन राज्यों में चुनाव हुए और जिनमें भाजपा के मुख्यमंत्री थे और संयोग या दुर्योग से पराजित हो गए वे सभी एक साथ बिना किसी भेदभाव के अब दिल्ली शिफ्ट कर दिए गए हैं। वे अब पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष होंगे।अर्थात मध्य प्रदेश के श्री शिवराज सिंह चौहान, राजस्थान की श्रीमती वसुंधरा राजे और छत्तीसगढ़ के डॉ.रमन सिंह को अब वापस दिल्ली बुला लिया गया है।
यह भी अजीव संयोग है कि लगभग दो दशक पूर्व तीनों ही दिल्ली से सबको इन राज्यों में भेजा गया था।दो सरकार में थे और एक श्री चौहान संगठन के राष्ट्रीय पदाधिकारी थे।उस समय सर्वश्री अटलबिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी की जोड़ी सक्रिय थी,तीनों को उनकी सहमति से राज्यों में मुख्यमंत्री बनाकर भेजा गया।तीनों ने अपेक्षा के अनुरूप अच्छा कार्य किया और अब 2018 के दिसम्बर में कुछ तकनीकी कारणों से सत्ता से उन्हें च्युत होना पड़ा पर तीनों ही विधायक के रूप में निर्वाचित होकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में सक्रिय भूमिका निर्वहन करने के लिए अपने को तैयार कर रहे थे तब उनसे कहा गया कि वे अपनी सभी भूमिकाएं,महत्वाकांक्षाएं समेटकर पुनः दिल्ली आ जाएं और आगामी लोकसभा चुनाव के लिए तज्ञ होकर जुट जाएं।फर्क इतना है कि अब नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी काबिज है पर व्यक्तियों के अनजाने से इस संगठन के स्वास्थ्य पर कोई खास फर्क नहीं पड़ता।
इन तीनों के साथ कुछ और भी समानताएं थी जिनका उल्लेख करना भी प्रसंगवस आवश्यक है।आपको बहुत अच्छा लगेगा।तीनों को अपने अपने प्रदेशों में कार्य करने की पूरी छूट दी गई और तीनो ने अपने अपने राज्यों में जमकर ‘पटेला चलाया ‘ पटेला यह शब्द संज्ञा आपको शायद अनौखी लगेगी क्योंकि अधिकांश मित्र खेती और कृषिकार्य से शायद दूर हो गए होंगे पर जो खेती के बारे में जानते होंगे वे तुरंत समझ जाएंगे कि मैं कहना क्या चाहता हूँ? खेतों में हल से जुताई की जाती है ,फिर जहां बखर चलाया जाता है यहां सतही जमीन को जोता जाता है।हल-बखर कोई भी चलाये,भूमि को समतल पटेला से किया जाता है।हां, अब नए आधुनिक किस्म के पटेला आ गए हैं पर भूमि को मनोनुकुल करने के लिए पटेला चलाकर सभी ऊंचे,नीचे ढेले निर्ममता से समतल पटेला से कर दिए जाते हैं और जहां भुरभुरी और बलुआर भूमि हो तो वहां तो कोई दूसरा सबूत बचता ही नहीं।कई राज्यों में ऐसा हुआ ।मुख्यमंत्री के अलावा ‘द्वितीयं नास्ति’ की स्थिति भी बन गई।हाल के चुनाव में तो पूरा देश ने आश्चर्यचकित होकर देखा कि इन तीनों राज्यों में टिकट वितरण की जिम्मेदारी इन्हीं मुख्यमंत्रियों के ऊपर छोड़ दी गई।इससे पूर्व राजनीतिक समीक्षक और मीडियाकर्मी अपने अपने ढंग से अनुमान लगाते ही रहे ,कोई संघ के महत्व को प्रतिपादित करता रहा तो कोई संगठन को महत्व देता रहा किन्तु मूल रूप से अंतिम निर्णय इन्हीं मुख्यमंत्रियों ने लिया।
राजस्थान और मध्य प्रदेश में तो यह भी हुआ कि सरकार पुनः बनाने में मार्जिनल कमी रह गई । वे तोड़फोड़ के लिए मन बनाते कि उन्हें कड़ाई से रोक दिया गया जैसे उनसे कहा जा रहा हो कि ” देख लिया तुम्हारा सामर्थ्य !अब चुपचाप वापस दिल्ली चले आओ।वहां और भी है सामर्थ्यवान ”
तीनों राज्यों में सरकार कांग्रेस की बन गई ,तीनों नेता चुप चाप लोकतंत्र की दुहाई देकर अपनी भूमिका सशक्त करते,नए आबंटित बंगलों को सम्हालते अपने को सहज करते कि उनसे कहा गया और वे चुपचाप दिल्ली आ गए ,उनसे कहा गया कि संगठन का दायित्व सम्हालिये,आपकी विधानसभाओं में कोई भूमिका हालफिलहाल नहीं है।(भविष्य में क्या होगा ,कौन जानें?) पर वे बेचारे (कह सकते हैं)यंत्रवत अनुशासित सिपाही की तरह (यदि चाहें तो, संगठन के अध्यक्ष के बाद महत्वपूर्ण पद और दायित्व है , गर्व और गौरव भी के साथ ) नए दायित्व की भूमिका में आयोजित राष्ट्रीय परिषद के सम्मेलन में शामिल हैं।
मैंने व्यक्तिगत रूप से संगठन से भी सरोकार रखा, स्वाद चखा ,कोई चार दशक पत्रकारिता का भी प्रत्यक्ष अनुभव है और राजनीतिक क्षेत्र को बहुत नजदीक से देखा है । अब सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय हूँ,राजनीतिक विज्ञान का विद्यार्थी भी रहा हूँ,मैंने इस तरह का भाजपा जैसा स्थितिप्रज्ञ संगठन दूसरा नहीं देखा।मैं जब ऐसा कह रहा हूँ तब मेरे मन में इस संगठन के प्रति प्रशंसा के ही भाव हैं।आपके क्या भाव होंगे, आप जाने और यह भी सही है कि इस मामूली से निर्णय को आगे आनेवाले दिनों को देखा ,परखा और चर्चा में खूब जाएगा और चिंतन मनन भी बहुत होगा पर आज तो यही बहुत है कि आप इसका जमकर आनन्द लीजिये।आप चाहें तो नेतृत्व,संगठन किसी की सराहना कर सकते हैं पर अच्छा तो यही रहेगा कि प्रशंसा और सहानुभूति का ही भाव रखें फिर आपकी मर्जी!

 

 

रामभुवन सिंह कुशवाहा

स्वतन्त्र पत्रकार भोपाल

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