बरकतउल्ला विश्वविधालय के हॉस्टलों में पारिश्रमिक के नाम पर लूट

राजभवन और उच्च शिक्षा मंत्री को शिकायत

महेंद्र सिंह

भोपाल,03दिसंबर | बरकतउल्ला विश्वविधालय के छात्रावासों में लूट का आलम है | कर्मचारियों की मनमर्जी के चलते प्रशासन लाचार है और छात्रावास की व्यवस्थाएं बदहाल हैं | कर्मचारी तीन से चार घंटे काम करते हैं ,मनमानी छुट्टियाँ लेते हैं ,लेकिन पगार तो पूरी मिलती ही है ,साथ में पारिश्रमिक भत्ते के नाम पर भी तीस से  चालीस हजार रूपए हर साल डकार रहे हैं | इसमें वार्डनों की मिलीभगत तो है ही , कुलपति ,रजिस्ट्रार भी मूकदर्शक बने बैठे हैं | मामले की शिकायत राजभवन और उच्च शिक्षा मंत्री को की गई है |

बरकतउल्ला विश्वविधालय में तीन कन्या और तीन बॉयज हॉस्टल हैं | पुरुष छात्रावास तो राम भरोसे हैं, कन्या छात्रावास भी कर्मचारियों की मनमानी के शिकार हैं | छात्रावासों में कर्मचारी चाहे जब आते हैं और चाहे जब जाते हैं ,लेकिन वार्डनों की मजाल नहीं कि किसी की टोकाटाकी कर सकें | कर्मचारी बमुश्किल तीन से चार घंटे काम करते हैं ,लेकिन वेतन पूरे आठ घंटे का मिलता है और ऊपर से चाय-पानी ,भोजन ,परोसा (घरवालों के लिए भोजन ) के अलावा तीस से  चालीस हजार रूपए पारिश्रमिक अलग से लेते हैं | पहले कर्मचारी खुद स्वयं भोग लगाते हैं ,तब छात्र भोजन पाते है | अगर कुछ स्पेशल भोजन बना तो पहले आप स्वयं फिर घरवालों के लिए पैक   तब छात्रों का नंबर आता है | अक्सर भोजन कम पड़ जाता है |

छात्रों ने बताया कि हालात यह हैं कि अगर हम कर्मचारियों की शिकायत करते हैं ,तो वह हमें डराते –धमकाते हैं और भोजन में कभी मिर्च भर देते हैं तो कभी तेल ज्यादा पटक देते हैं | मौका लगता है तो सामान पर भी हाथ साफ़ कर देते हैं | व्हिसल ओवर के ध्यान में यह मामला आने पर सूचना के अधिकार के तहत ऐसे कर्मचारियों की जानकारी माँगी गई थी ,लेकिन जानकारी तो नहीं दी गई उलटे जल्द पारिश्रमिक देने के लिए दांव –पेंच चले जा रहे हैं | बॉयज हॉस्टल की पारिश्रमिक की फाइलें तो ले –देकर निबटाई जा रहीं हैं , कन्या छात्रावासों की हालत भी इतर नहीं है | इंदिरा गाँधी कन्या छात्रावास की तो मूल नस्ती ही गायब कर दी गई है और स्ववित्तीय में कार्यरत कर्मचारियों को पारिश्रमिक दिलाने के लिए नई नस्ती बना दी गई है | लक्ष्मीबाई कन्या हॉस्टल में तो और भी स्थिति विकट है, यहाँ कर्मचारी किसी की नहीं सुनते | चाहे वह ए (अनुपस्थित ) रहें  लेकिन लगाते पी (उपस्थिति) ही हैं | कर्मचारी एक वार्डन/अधीक्षिका  के घर सुबह दस से बारह और शाम पांच से आठ तक हाजिरी बजाता है ,किन्तु कोई अधिकारी उंगली नहीं उठाता | निवेदिता में कर्मचारी डेढ़ –डेढ़ महीने की छुट्टी मनाते हैं और बाद में सब मैनेजमेंट हो जाता है |

यह है पारिश्रमिक का नियम

जबकि इस मामले में नियम यह है कि पारिश्रमिक के पात्र वही कर्मचारी हैं जो प्रतिदिन आठ घंटे से ज्यादा / कार्यालयीन समय के पूर्व एवं पश्चात ड्यूटी करते हैं और अतिरिक्त काम करते हैं ,लेकिन हॉस्टल के कर्मचारी मनमर्जी के मालिक हें | जब खाना ही उनकी मेहरबानी पर निर्भर है तो अतिरिक्त कार्य क्या करते होंगे ,इसका अंदाजा सहज लगाया जा सकता है |

जवाब से कतराए रजिस्ट्रार

जब इस मामले में रजिस्ट्रार अजीत श्रीवास्तव को फोन लगाया ,तो उन्होंने कहा अस्वस्थ होने के कारण अवकाश पर हूँ | बाद में बात करता हूँ

खबर सूत्रों के आधार पर है

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