पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के पिता प्रेम सिंह का निधन, कल शाम 4 बजे जैत में होगा अंतिम संस्कार

 

भोपाल. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के पिता प्रेम सिंह चौहान का निधन हो गया। उन्होंने मुंबई के लीलावती अस्पताल में अंतिम सांस ली। वह काफी समय से बीमार चल रहे थे। शिवराज सिंह चौहान मुंबई के लिए रवाना हो गए हैं। उन्होंने थोड़ी देर पहले ही भोपाल में भाजपा की जीत पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इसी दौरान उन्हें पिता के निधन की खबर मिली।

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शिवराज सिंह के पिता के निधन पर शोक संवेदना जताई है। उन्होंने ट्वीट कर कहा-प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के पिता प्रेम सिंह जी के दुखद निधन की ख़बर प्राप्त हुई। परिवार के प्रति मेरी शोक संवेदनाएं। दुख की इस घड़ी में हम सभी परिवार के साथ।

निधन की ख़बर मिलते ही शिवराज सिंह चौहान मुंबई के लिए रवाना हो गए हैं। प्रेम सिंह काफी समय से बीमार चल रहे थे। कुछ दिन पहले ही उन्हें मुंबई रैफर किया गया था। जहां के लीलावती अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उन्होंने मुंबई में ही आख़िरी सांस ली।

बाबूजी के नाम से प्रसिद्ध 84 वर्षीय प्रेम सिंह चौहान अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़कर गए हैं। उनके सबसे बड़े पुत्र शिवराज सिंह चौहान हैं। इसके बाद पुत्री शशि महेश पटेल, नरेंद्र सिंह चौहान, रोहित सिंह चौहान, वरुण सिंह चौहान हैं ।

जैसे ही उनके निधन का समाचार मिला तो क्षेत्र सहित संपूर्ण मध्यप्रदेश में शोक की लहर छा गई।  चौहान अपने पिता की पार्थिव देह लेकर देर रात को भोपाल पहुंचेंगे और सुबह 9:00 बजे तक 224/9 बी साकेत नगर भोपाल स्थित उनके निवास पर पार्थिव देह अंतिम दर्शन के लिए रखी जाएगी। इसके बाद उन्हें ग्रह ग्राम जैत ले जाया जाएगा यहां शाम 4:00 बजे नर्मदा तट पर उनका अंतिम संस्कार होगा।

 

साधारण परिवार में जन्मे किसान थे बाबूजी

प्रेम सिंह चौहान बाबूजी साधारण परिवार में जन्मे किसान थे और उन्होंने अपना पूरा जीवन एक साधारण व्यक्ति की भांति ही जिया। पूर्व वन विकास निगम अध्यक्ष गुरु प्रसाद शर्मा ने उनकी जीवनी के बारे में बताया कि वह हमेशा साधारण रहे और उनके मन में इस बात का कोई दंभ नहीं रहता था कि वह एक मुख्यमंत्री के पिता हैं। वह हमेशा जहां पर भी जाते साधारण नागरिक की तरह लोगों से मिलते थे। उन्होंने आखिरी समय तक भी अपना गांव नहीं छोड़ा था तथा भोपाल में रहने के बावजूद भी गांव में उनका आना-जाना लगा रहता था।

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