पुस्तकें व ड्रेस लेने का दबाव नहीं बना सकेंगे स्कूल संचालक

उज्जैन, 08 मार्च । अशासकीय स्कूलों द्वारा शैक्षणिक सत्र प्रारम्भ होने पर नवीन प्रवेश लेने वाले एवं अध्ययनरत छात्रों पर बलपूर्वक दबाव बनाया जाता है कि वे उसी विद्यालय से अथवा विद्यालय परिसर में उपलब्ध विक्रेता से पाठ्यपुस्तकें एवं गणवेश खरीदें। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी संकेत भोंडवे ने इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिये धारा-144 तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर दिये हैं। कलेक्टर ने धारा 144 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर निर्देश दिये हैं कि पुस्तक विक्रेताओं को नोटबुक कॉपी पर ग्रेड, किस्म, साइज, मूल्य, पेज की संख्या की जानकारी स्पष्ट रूप से उल्लेखित करें। सम्बन्धित विद्यालय पालकों अथवा छात्रों को किसी विशेष दुकान, विक्रेता अथवा संस्था से पाठ्य सामग्री खरीदने हेतु बाध्य नहीं कर सकेगा। विद्यालय का नाम मुद्रित नोटबुक्स प्रतिबंधित की गई है। साथ ही विद्यालय की गणवेश पर विद्यालय का नाम, लोगो-मोनो प्रिंट करवाकर दुकानों से विक्रय करने अथवा एक विशिष्ट दुकान से विद्यालय विशेष की गणेवश बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया है। बहुत अधिक पाठ्यपुस्तक जो शैक्षणिक रूप से अप्रमाणित हैं, को निर्धारित करना एवं अभिभावकों एवं बच्चों को उनको खरीदने हेतु बाध्य नहीं किया जायेगा। पुस्तक एक ही स्थान से क्रय करने सम्बन्धी कोई बाध्यता नहीं रहेगी। कोई भी दुकानदार-विक्रेता कॉपी एवं किताब का सेट बनाकर विक्रय नहीं करेगा। कलेक्टर द्वारा जारी आदेश अनुसार स्कूलों में लगने वाले यूनिफार्म, टाई, बैच, बेल्ट, कव्हर, स्टीकर का रंग, प्रकार आदि के सम्बन्ध में पीटी, बैठक में तय करके पूर्व घोषणा विद्यालय द्वारा की जायेगी। इस सामग्री को छात्र एवं पालकों द्वारा खुले बाजार से क्रय किया जा सकेगा। यूनिफार्म बाजार से क्रय करने की छूट रहेगी एवं किसी दुकान विशेष से क्रय करने हेतु बाध्य नहीं किया जाएगा। उक्त आदेश का उल्लंघन भारतीय दण्ड संहिता की धारा-188 के अन्तर्गत दण्डनीय अपराध होगा। 

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