तीन तलाक पर भाजपा को मिला मुस्लिम महिलाओं का साथ

लखनऊ, 12 मार्च । उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मुस्लिम महिलाओं ने भी इस बार भाजपा का साथ दिया। तीन तलाक के मुद्दे पर मुस्लिम महिलाओं का केंद्र सरकार ने खुलकर समर्थन किया था। अन्य कोई भी राजनीतिक दल इस संवेदनशील मुद्दे पर मुस्लिम महिलाओं के साथ खड़ा नहीं हुआ था। मुस्लिम धर्मगुरुओं और मुस्लिम नेताओं ने भी मोदी सरकार को हिदायत दी थी कि वह उनके धार्मिक और जाती मामलों में दखलंदाजी न करें लेकिन इसके बाद भी मोदी सरकार अपने-हानि लाभ की परवाह किए बगैर इस बात पर अड़ी रही कि यह नारी अस्मिता और उस पर होने वाले अन्याय का मामला है और केंद्र सरकार किसी के भी साथ अन्याय नहीं होने देगा। उसकी यही अदा मुस्लिम महिलाओं को रास आई और उसने जाति-धर्म से ऊपर उठकर भाजपा का साथ दिया। यह जानते हुए भी कि इस बार भाजपा ने किसी भी मुस्लिम को टिकट नहीं दिया है। मुस्लिम महिलाओं के भाजपा के साथ देने को क्रिया की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। मायावती परेशान हैं कि मुस्लिम बहुल इलाकों में भाजपा कैसे जीत गई। उन्हें लग रहा है कि इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों में छेड़छाड़ की गई है लेकिन उन्हें यह क्यों नहीं लगता कि लगभग 10 प्रतिशत मुस्लिम महिलाओं ने जाति-धर्म से ऊपर उठकर विकास और सामाजिक न्याय की स्थापना के लिहाज से भाजपा के पक्ष में वोट कर दिया है। मुस्लिम पुरुषों ने जहां सपा और बसपा के पक्ष में मतदान किया, वहीं मुस्लिम महिलाओं ने भाजपा की ओर रुख कर सपा, बसपा और कांग्रेस की जड़ें हिला दीं। प्रदेश की 126 मुस्लिम बहुल विधानसभा सीटों में से 99 सीटों पर भाजपा की जीत से विरोधी दल भी हैरान हैं। प्रदेश में 75 में से 31 जिलों में भाजपा की क्लीन स्वीप में युवाओं और महिलाओं की बड़ी भूमिका रही है। भाजपा के घोषणा पत्र में भाग्य लक्ष्मी योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना को लागू करने, तीन महिला पुलिस बटालियन बनाने, महिला उत्पीड़न के मामलों के लिए एक हजार महिला अफसरों का विशेष जांच विभाग बनाने और सौ फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का वादा भी महिलाओं को काफी अच्छा लगा। अखिलेश शासन में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध से भी उनकी नाराजगी जगजाहिर थी और उन्होंने भाजपा में आस्था जताकर विकास और सुशासन के दस्तावेज पर अपने हस्ताक्षर कर दिए। भाजपा ने दावा किया था कि उसकी पार्टी की उत्तर प्रदेश सरकार सर्वोच्च न्यायालय में लंबित तीन तलाक के मामले में मुस्लिम महिलाओं की राय के आधार पर उनका पक्ष रखेगी। इससे तलाक की आशंका मात्र से परेशान मुस्लिम महिलाओं ने भाजपा को अपना मत देना ज्यादा मुफीद समझा और घर के लोगों को इसकी भनक तक नहीं लगने दी। चुनाव परिणाम से मुस्लिम मतदाता भी परेशान हैं कि उनकी बहुलता वाले विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा कैसे जीती। वे अपने घर की महिलाओं से पूछ रहे हैं और वे धीरे-धीरे उन्हें यह बात बताने भी लगी हैं कि जब भाजपा ही उनकी रक्षक बनकर उभरी है, अन्य कोई दल उनके हितों की रक्षा नहीं कर रहा तो वे उन्हें वोट क्यों दे। जो बात मुस्लिम मतदाताओं ने भाजपा के संदर्भ में कही थी कि जब भाजपा ने एक भी मुस्लिम को टिकट नहीं दिया तो भाजपा को हम वोट क्यों दें। कुछ उसी तरह के जवाब अपनी गृहणियों से सुनने पड़ रहे हैं और साथ ही वे उन्हें धमका भी रही हैं कि अगर अब उन्होंने उत्पीड़ित किया तो वे पुलिस में इस बात की शिकायत करेंगी कि भाजपा को वोट देने की वजह से उनका उत्पीड़न किया जा रहा है। कुल मिलाकर इस चुनाव ने मुस्लिम महिलाओं को जागृत करने का भी काम किया है। अगर यही हालात रहे तो मुस्लिम पुरुषों को तलाक के मामले में अपना स्टैंड बदलना होगा और यह एक बड़े सामाजिक सुधार की शुरुआत होगी। 

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