जानिए, कन्या भोज से कैसे मिलेगी कीर्ति वैभव यश

 

कन्या भोज जगत जननी मां अंबे की आराधना है जिसमें व्यक्ति को यश कीर्ति वैभव एवं मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है

कन्या भोज का महत्व :

कन्या भोज नवरात्रि पर्व मैं सप्तमी अष्टमी और महानवमी को किया जाता है अनुष्ठान पूर्ति व्रत पूर्ति और व्रत क्यों अध्यापन के पश्चात नवरात्रि में कन्या भोज का आयोजन हर घर में होता है जिसमें माता के नौ रूपों को स्वरूप नौ कन्या में माना जाता है यह नौ कन्या नव निधि अष्ट सिद्धि की प्राप्ति हेतु भी आशीर्वाद देती है नौ कन्या भोजन कराया जाता है

 

कन्या भोज मे इन सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए

कन्या भोज करते समय हमें कुछ विशेष चीजों का ध्यान रखना चाहिएकन्या की उम्र 12 वर्षों से अधिक ना होकन्या भोज के समय कन्याओं को सर पर चुनरी जरूर देकन्या भोज के समय मिष्ठान अवश्य बनाएं दूध की खीर का प्रयोग कन्या भोज में अवश्य करें पूरी भी जरूर बनाएं प्याज लहसुन से बने पदार्थों का परहेज करेंकन्या भोज के पहले कन्याओं को तिलक उनके पैरों में रोली मोहर लगाकर उनके चरणों का धोकर सहाब स्वच्छ कर उनके पैरों में माहुर लगाकर चरण स्पर्श करें.कन्या भोज के उपरांत दक्षिणा देकर फल और मिष्ठान देकर माता के आशीर्वाद लेकर कन्याओं के आशीर्वाद लेकर उन्हें विदा करें

जय मां जगत जननी

नौ कन्या भोजन में लंगूर का होना भी परम आवश्यक यह कौन होता है जानते हैं

नौ कन्या भोज में कन्या के अलावा एक लंगूर की आवश्यकता होती लंगूर साक्षात हनुमान जी का स्वरूप होते माता के साथ-साथ आगे आगे हनुमान जी चलते ध्वजा वाहक होते हैं अतः कन्या भोज में एक लंगूर की भी आवश्यकता होती है वह लंगूर बाल हनुमान छोटा बालक होता है जो कन्या के उम्र का ही होना चाहिए उसका भी विधिवत पूजन कर दक्षिणा और भोज करवाना अति आवश्यक है

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