जब ताजनगरी कलंकित होकर शर्मशार हो गई

गोपाल गुप्ता:

सरकार का “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ “नारा तो सफल होता हुआ दिख रहा है, लोग अब इतने जागरुक और गंभीर होकर बेटियों को बचा भी रहे हैं और पढ़ा भी रहे हैं। मगर उन खूनी दरिंदों से बेटियों को कोन बचाये? जो बिना किसी खौफ के बेटियों को दिन दहाड़े गोलियों से भून रहे हैं। ऐसा ही एक वाक्या गत बुधवार को मुहब्बत के लिए दुनिया भर में मशहूर ताजनगरी आगरा में घटित हो गया, जिससे ताजनगरी आगरा को कलंकित होकर शर्मशार होना पड़ा। दरअसल दो रोज पहले रविवार को ही उत्तर प्रदेश बार कौंसिल की अध्यक्ष चुनी गई दरवेश यादव की दिन-दहाड़े उसी न्याय के मंदिर के परिसर आगरा में जहां वे निर्दोषों की जान बचाती थीं, गोली मारकर हत्या कर दी। दिन -दहाड़े कचहरी परिसर में हुई दरवेश की हत्या से सनसनी फैल गई और चारो तरफ अफरा-तफरी का आलम पैदा हो गया। ये सनसनी और अफरा-तफरी इसलिये भी ज्यादा थी, क्योंकि गोली मारकर हत्या करने वाला भी दरवेश यादव का साथी वकील मनीष बाबू शर्मा था। मनीष शर्मा ने सबसे पहले तीन घण्टे अपना विजय जुलूस निकालने के बाद अपने साथी वकील अरविंद मिश्रा के चैंबर में बैठी दरवेश यादव पर सामने से तीन गोली चलाईं। एक चेहरे पर और दो सीने पर लगी इसी के साथ खून-ऐ-हाल दरवेश जमीन पर गिर गई।इधर अधिवक्ता मनीष बाबू शर्मा ने एक गोली अपनी कनपटी पर भी मार ली, इससे वो भी खूनजदा होकर जमीन पर गिर गया। इससे पहले मनीष बाबू ने एक गोली दरवेश यादव के बगल में बैठे उनके रिस्तेदार मनोज पर भी चलाई मगर वो झुक गया था
जिससे वो बच गया मगर वो हत्याकांड के करीब 10 मिनिट तक जमीं पर दहशत जदा होकर बैठा ही रह गया। कुछ देर बाद वहां मौजुद लोगों ने दरवेश यादव को नजदीक में ही स्थित पुष्पाजंलि अस्पताल पहुंचाया, मगर डाॅक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इधर मनीष बाबू को एक अन्य अस्पताल ले जाया गया ,जहां उसकी हालत खतरे में देख उसके परिजन उसे मैंदाता गुड़गांव ले गये।

उप्र के एटा जिले की मूल निवासी दरवेश यादव ने आगरा काॅलेज से विधी में स्नात्तक कर आगरा के ही डाॅ. भीमराव आंबेडकर विश्वविधालय से एलएलएम की परीक्षा पास की थी। इसके बाद उन्होने 2004 से वकालात का अपना व्यवसाय आगरा से ही शुरु कर अधिवक्ताओं की राजनीति में अपना सिक्का स्थापित कर दिया था। वे पहली दफा 2012 में बार की सदस्य चुनी गई, 2016 में बार की उपाध्यक्ष और 2017 कार्यकारी अध्यक्ष बनी। अब रविवार को ही उन्हें उत्तर प्रदेश बार काउंसिल का अध्यक्ष घोषित किया गया था। वे उप्र बार काउंसिल की पहली महिला अध्यक्ष थीं। दरवेश यादव की हत्या पर विपक्ष ने उप्र की योगी सरकार को निशाने पर लेते हुये प्रदेश में जंगलराज और गुण्डों कानून लागू होने का आरोप लगाया है।हालांकि विपक्ष का सरकार घेरने का पूरा अख्तियार है। मगर इसमें योगी सरकार ही नहीं दुनिया की कोई सरकार क्या कर सकती है? जब बाढ़ ही खेत को खा जाये। वो अधिवक्ता जिस पर निर्दोष की जान बचाने का भार होता है आखिर वो किसी की जान कैसे ले सकता है? वो एक शख्सियत की जो बराबर से उसी की तरह स्वयं अधिवक्ता हो। जब तात्कालिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या उनके ही सुरक्षा गार्डों ने कर दी थी, तो कोई सरकार उसमें क्या कर सकती थीं? मनीष बाबू शर्मा भी दरवेश यादव जी का बेहद परिचीत और नजदीक था, अब वही सहयोगी से भक्षक बन जाये तो कोई पुलिस प्रशासन क्या कर सकता है? कितना दुखद और कष्टदायक है कि अभी तो दरवेश, उनके परिजन व बंधु -बांधव उनकी जीत का जश्न भी नहीं मना पाये और वे भी पहली महिला अध्यक्ष होने के नाते प्रदेश बार काउंसिल का कार्यभार भी ग्रहण नहीं कर पांई की मनीष जैसे दरिंदे ने एक होनहार बेटी दरवेश को हमैशा -हमैशा के लिये मौत की नींद सुला दिया। बाकई ये हादसा ताजनगरी आगरा को कलंकित कर शर्मशार कर गया।

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