छह दिन बीतने के बाद भी लागू नहीं हुआ फीस रेग्युलेशन एक्ट

 

 

 

भोपाल/इंदौर। अप्रैल माह शुरू हुए छह दिन हो गए लेकिन अभी तक शासन ने फीस रेग्युलेटी एक्ट लागू नहीं किया है जिससे पालकों का आक्रोश बढ़ता ही जा रही है जबकि पिछले दिनों स्कूली शिक्षा मंत्री विजय शाह ने निजी स्कूलों के डायरेक्टरों की बैठक बुलाकर एक अप्रैल तक फीस रेग्युलेटी एक्ट लागू करने के लिए कहा था। छह दिन बीतने के बाद भी इसे लागू नहीं कराया गया है।

ऊपर से स्कूल संचालकों द्वारा पालकों पर फीस भरने का दबाव बनाया जा रहा है जिसको लेकर पालकगण परेशान हो रहे है और उन्होंने फीस वृद्धि के विरोध में स्कूल के बाहर प्रदर्शन कर प्रबंधन को ज्ञापन भी सौंपा है और अब पालकों का कहना है कि इसके लिए कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। हर साल निजी स्कूलों द्वारा बढ़ाई जा रही फीस के कारण पालकों का आक्रोश लगातार बढ़ता ही जा रहा है। कुछ स्कूल ऐसे है जिन्होंने फीस वृद्धि करने के साथ ही पालकों पर किताब-कॉपियों से लगाकर सभी स्टेशनरी का सामान व डिक्शनरी के अलावा यूनिफार्म तक स्कूल से ही खरीदने का दबाव बनाया है।

सांवेर स्थित आईपीएस स्कूल में तो प्रबंधन ने किताब, कॉपियों के साथ आक्सफोर्ड की डिक्शनरी खरीदने के लिए पालकों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। इसके लिए बकायदा 3100 रुपए का पैकेज बनाकर पालकों से शुल्क के रूप में वसूले जा रहे है। यह तो केवल तीसरी कक्षा के लिए है। अन्य कक्षाओं के लिए अलग-अलग शुल्क वसूल किया जा रहा है। वहीं अन्नपूर्णा रोड स्थित प्रोग्रेसिव स्कूल में पिछले दिनों 25 से 30 प्रतिशत तक फीस वृद्धि करने पर पालकों द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा है लेकिन इसके बाद भी प्रबंधन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है। पालकों द्वारा शासन से भी फीस रेग्युलेटी एक्ट लागू करने की मांग की जा रही है।

पिछले ही दिनों स्कूली शिक्षा मंत्री विजय शाह ने निजी स्कूल संचालकों की बैठक भोपाल में बुलाई थी जिसमें कहा था कि एक अप्रैल से शासन फीस रेग्युलेटी एक्ट लागू कर रहा है लेकिन इसके भी छह दिन बीत गए और उधर प्रबंधन द्वारा पालकों को आज तक फीस नहीं जमा कराने के लिए नोटिस देते हुए अंतिम चेतावनी दी है जिसके विरोध में पालक बड़ी संख्या में स्कूल के बाहर जमा हुए और उन्होंने प्रदर्शन करने के बाद प्रबंधन को ज्ञापन भी सौंपने का प्रयास किया लेकिन कोई भी ज्ञापन लेने नहीं आया।

अब पालकों का आक्रोश धीरे-धीरे बढ़ता ही जा रहा है जिसके चलते पालकों ने कानूनी लड़ाई लडऩे का निर्णय लिया है। इसी तरह अन्य स्कूलों में भी फीस वृद्धि के खिलाफ पालकगण लामबंद हो रहे है और उन्होंने भी स्कूलों द्वारा ली जा रही भारी भरकम फीस का विरोध करना शुरू कर दिया है।

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