“गरीबों को पैसा ट्रांसफर करने की योजनाओं पर सर्जिकल स्ट्राइक”

 

 

               

 

आम-चुनाव – 2019 की प्रक्रिया शुरू हो गई है व हर राजनैतिक दल और सत्ता की कुर्सी हासिल कर लेने का लालची गरीबो की गरीबी दूर कर देने की अपने अधीनस्थो के द्वारा बनाई योजना का पीटारा बजा स्वयं करोड़पति व अरबपति बनते जा रहा है व आम लोगो को गरीबी से मुक्ति पाने के लिए पहले उनसे वोट मांग रहे है |

एक राजनैतिक दल 6000 प्रतिवर्ष देने की बात कर रहा है और दूसरा 72000 प्रतिवर्ष का दाँव ठोक रहा है इसी बीच तीसरे ने 200000 प्रतिवर्ष का बिगुल बजा दिया है | यह सिलसिला तो चुनाव ख़त्म होने के बाद भी नहीं रुकेगा | इसमें सबसे अहम् बात इन राजनैतिक दलों की अपनी सरकार आयेगी तब और कोई भी अकेला सभी चुनाव सीटों पर उम्मीदवार खड़े नहीं कर रहा है | यदि किसी को बहुमत भी मिला तो वह गढ़बंधन की ही सरकार बनायेगा अर्थात हींग लगे ना फिटकरी रंग भी चोखा आये |

पैसा देने की योजनाओ के मूल आधार असली में किसे, किस आकलन, किन दस्तावेजों के सहारे कितना पैसा कौनसी प्रक्रियाओं के बाद मिलेगा उसे छोड़ बहस को इस दिशा में घुमा दी गई की इतना पैसा आयेगा कहा से …. इससे पहले देश में हर राजनैतिक दल में सत्ता में आने के बाद कई स्कीमों का ऐलान किया परन्तु लोग अवाक व निशब्द रह गये जब उनके हाथो में दो, पांच व दस रुपये के चेक पकड़ा बेवकूफ बनाने का अहसास कराया गया |

इस बार भी ऐसा ही होगा और चुनाव के बाद कही बैंक खातों में दो, पांच व दस रुपये ही आयेंगे | हम आपको उस पर्दे के पीछे का खेल बताते है जिसे अधिकांश अर्थशास्त्री, चार्टेड अकाउंटेंट जो बड़े-बड़े संवैधनिक पदों पर रहे वो भी नहीं बता रहे है या इनके अतरिक्त सभी की समझ को दूसरी जगह भटका के बहार कर दिया गया है |

वर्तमान सरकार के कार्यकाल के दोहरान संसद में एक विशेष फाइनेंस बिल पास करा है | इसके तहत “कर योग्य आय” की परिभाषा बदल कर सब्सिडी, अनुदान, रियायत, डयूटी को भी इसमे शामिल कर लिया | यह भुगतान केंद्र व राज्य सरकार के आलावा कोई भी अथॉरिटी या एजेंसी करे वो भी गिना जायेगा |

वर्तमान में सरकार सरकारी स्कीम या उत्पाद का पैसा बाजार दर से पहले ही ले रही है और उसे अनुदान कहके आपके बैंक खाते में जमा करा रही है | कई स्कीम में यह लागु हो चुका है व शेष में अति शीघ्र लागु हो जायेगा | यदि ऐसा नहीं भी हो तो आपको “रियायत” वाले बिल के कॉलम में लिखकर कम पैसा ले लिया जायेगा अर्थार्त एक बड़ी कमाई आपके खाते में जोड़ दी जाएगी | सरकार को भी पहले करोडो रुपये की व्यवस्था कर खर्च करने का काम ही नहीं करना पड़ेगा | यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा |

इसे आंकड़े में समझे तो एक गैस की टंकी इस्तेमाल करने पर आपकी आय करीबन 200 रुपये बढ़ी और एक कनेक्शन पर 12 टंकी अर्थार्त आय हो गई 2400 रुपये | गरीबी के दायरे में आने वाले के लिए प्रति व्यक्ति 3 -5 लीटर केरोसिन प्रतिमाह अर्थार्त 60 रुपये की अतिरिक्त्त आय | सरकारी एक रूपया किलो गेहू व दो रुपये किलो चावल में दस किलो गेहू लो या पांच किलो चावल प्रतिमाह 150 रुपये की अतिरिक्त्त आवक, शक्कर पर अतिरिक्त्त 15 रुपये की कमाई व अलग अलग राज्यों में दाल, दलिया, प्याज, टमाटर आदि पर सेकड़ो में कमाई का सरकारी टोकन |

यदि आपके घर में बच्चे की डिलेवरी हुई तो इलाज के नाम पर करीबन 3000 रुपये की कमाई व 1400 रुपये कॅश आय | पहले ही बच्चे है तो उसको फ्री शिक्षा, किताबे व दिन में खाने के रूप में हजारो की प्रतिमाह कमाई | यदि बैग, साइकिल, लैपटॉप मिला तो छपड़ फाड़ के कमाई आपके खाते में जुड़ गई | यदि लड़की हुई तो धन लक्ष्मी, बालिका सुरक्षा, कन्यादान न मालूम किस किस नाम से चंद रुपये देकर हजारो की अतरिकत आय | यदि जन धन योजना में फ्री बैंक खाता खोला है तो 2 लाख का बीमा और बाजार मूल्य के हिसाब से 200 से 500 रुपये की अतिरिकत मासिक आय | सरकारी रियायत पर जमीन व उसके पट्टे पर बम्पर मासिक आय | आपके कमाई वाले कॉलम को भरने के लिए सरकार ने धन कुबेर का दरवाजा अपने लिए खोल सेकड़ो योजनाये चला रखी है |

मंदिर, चर्च, दरगाह, गुरुद्वारे जैसे सभी धार्मिक स्थल भी अन्य अथॉरिटी व एजेंसी में एन जी ओ की तर्ज पर दायरे में आगये अर्थार्त यहाँ प्रसाद खाया, किसी कार्य में भोजन करा, कम्बल, चप्पल, साड़ी, पुराने कपडे लिए वो भी आपकी कमाई में गिने जायेगे | अनु – दान यानि थोड़ा रिबेट और दान यानि पूरा रिबेट | यदि आप सरकारी अस्पताल में इलाज कराने गये तो पैसा नहीं लगेगा परन्तु आपकी इनकम जरूर बढ़ जाएगी | यदि एन जी ओ ने आपके मोहल्ले की सफाई करी तो खर्च-औसतन आपकी आय हो गई आख़िरकार सरकार ही तो एन जी ओ को अनुदान राशि आप के काम करें के लिए दे रही है |

सब्सिडी की दर, न्यूनतम मूल्य, अनुदान राशि, क्रूड आयल को भारत में रिफाइन करने का खर्च, बाजार दर आदि पहले की भाति सरकार ही तय करेगी अर्थार्त अमीर बनाने की जादुई छड़ी सरकार के पास रहेगी | इस प्रकार एक गरीब आदमी की औसतन मासिक आय व मध्यम वर्ग की आय राजनैतिक दलों की घोषणाओं के आप-पास ही रहेगी आखिकार ऐसी योजनाओ को बनाने के लिए महीनो की माथापच्ची फालतू में ही नहीं करी गई है | अतः: कानूनन इस देश में कोई गरीब नहीं रहेगा व मध्यम वर्ग आयकर के दायरे में आ जाएगा अर्थार्त धनवान हो गया | आपका मानना या न मानना सबसे शक्तिशाली संसद के सामने नगण्य है |

इस खेल की सच्चाई यह है की वर्तमान में आ रहे नेताओ के बयानों को अब इस तरह से ले जो कहते है की वर्तमान में आम लोगो के लिए सरकारी योजनाओ में जितना पैसा खर्च हो रहा है उससे कम पैसो में ही वे लोगो के बैंक खातों में हजारो रुपये फ्री में ट्रांसफर कर देंगे |

इस तरह एक बार आप लोगो से वोट लेने के बाद अगले पांच वर्षो तक आप कुछ भी नहीं बोल पायेंगे व फिर आगे आपने आवाज उठाई तो सरकार आपकी बैलेंस शीट बता कर चुप रहने का संकेत देगी और उनसे जुड़े संगठन आपको घर आकर अच्छे से समझा देंगे | इसलिए मुफ्त के पैसो के लालच में फसकर यूही  मुफ्त में अपने मताधिकार को व्यर्थ में ना जाने दे l

शैलेंद्र विर्यानी

 

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