खाली कुर्सियों को योजनाएं समझाते रहे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का हर दांव उल्टा पड़ता जा रहा है। अपनी किसान नेता की छवि बचाने के लिए वो जितने भी जतन कर रहे हैं, सब फायदे की जगह नुक्सान पहुंचा रहे हैं। बड़ी तैयारियों के साथ भावांतर का भुगतान करने के लिए किसान महासम्मेलन बुलाया था। तय किया गया था कि 2 लाख किसान आएंगे परंतु पंडाल में 50 हजार से ज्यादा नहीं दिखे। पंडाल में हजारों कुर्सियां खाली रह गईं। ऐसी किरकिरी हुई कि खुद सत्तापक्ष के नेताओं के पास भी कोई सफाई नहीं रही। इधर मंगलवार को सीएम शिवराज सिंह पीएम नरेंद्र मोदी से मिले। इस मुलाकात के पीछे का राज आने वाले दिन में पता चल जाएगा लेकिन कहा जा रहा है कि किसान सम्मेलन की किरकिरी की खबरें मोदी और शाह तक भी पहुंच गईं हैं।

वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव ने मुख्यमंत्री द्वारा किसानों की कर्जमाफी को लेकर सीधे की गई मनाही और उन्हें उनकी फसलों का उचित दाम दिलाने की गई घोषणा पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि जो मुख्यमंत्री पिछले 14 सालों से स्वयं को किसानपुत्र बताते हुए किसानों को लेकर एक घोषणा भी पूरी नहीं कर पाए, वे अब उन्हें कैसा और कौन सा उचित दाम दिला पाएंगे? मुख्यमंत्री को अपनी ये घोषणाएं पूरी करने के लिए तारीख भी घोषित करनी चाहिए।

आम आदमी पार्टी के प्रदेश संयोजक और राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक अग्रवाल ने प्रदेश सरकार के किसान सम्मेलन को शर्मनाक बताते हुए कहा कि एक तरफ प्रदेश का किसान ओलावृष्टि के कारण सांसत में है। किसानों के माथे पर सिकन है और ऐसे में सत्ता के मद में चूर शिवराज सरकार ने किसान सम्मेलन के नाम पर अपना शक्ति प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस समय प्रदेश के मुखिया को किसानों के दरवाजे पर जाकर उनका हाल-चाल पूछना चाहिए था, वैसे समय में करोड़ों रुपये की बर्बादी महज अपनी झूठी घोषणाओं और जनविरोधी योजनाओं को चमकाने के लिए की गई।

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