क्या ये मुरैना के हक पर डांका नहीं है ?

 

श्रीगोपाल गुप्ता:

गत दिवस एक हिन्दी के प्रमुख अखबार में दो खबर एक साथ प्रकाशित हुईं! पहली खबर मप्र की कांग्रेस सरकार के मंत्रिमंडल गठन को लेकर थी जिसमें यह संभावना जताई गई है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ 21 के बाद मंत्रिमंडल विस्तार कर सकते हैं? इससे एक अदद मंत्री पद प्राप्त होने की संभावना से मुरैना-श्योपुर के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई, और उनको लगने लगा कि इस विस्तार में मुरैना-श्योपुर को एक मंत्री पद जरुर मिलेगा? चूकि मुरैना
जिले की छह में से छह विधानसभा सीट पर कांग्रेस के विधायक हैं और सुमावली विधायक ऐदलसिंह सबसे वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री हैं !इस उम्मीद से उनके समर्थकों में भारी खुशी देखी गई उन्हें तय लगने लगा कि इस विस्तार में उनके नेता का मंत्री बनना तय है! इसके साथ ही उक्त अखबार में दूसरी खबर धौलपुर के 2 पुलिसकर्मियों को पीटा, सुमावली विधायक के बेटे समेत 14 लोगों पर केश दर्ज नामक शीर्षक से खबर प्रकाशित हुई! इस खबर को पढ़ते ही मुरैना के अवाम को झटका लगा कि कहीं उक्त प्रकरण ऐदल सिंह कंषाना को मंत्री बनने से रोकने के लिए षडयंत्रपूर्वक विरोधियों के द्वारा कायम तो नहीं कराया गया है? हालांकि ऐदलसिंह कंषाना और उनके समर्थक इस घटना में पुत्र कप्तान सिंह कंषाना की संलिप्तता या हाथ होने से इंकार रहे हैं और इसे अपने खिलाफ षड़यंत्र मान रहे हैं! इसके साथ ही कप्तान सिंह कंषाना ने भी साफ कर दिया है कि वे घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे, घटना का जो दिनांक व समय बताया जा रहा है उस दिनांक व समय वे ग्वालियर में थे! इधर पिटाई, मोबाइल, अंगूठी, पर्स, एटीएम कार्ड लूट और अपहरण के तथाकथित शिकार बने दोनों पुलिसकर्मियों के संबंध में दर्ज एफआईआर में सुमावली विधायक ऐदलसिंह कंषाना के तथाकथित पुत्र बंकू कंषाना सहित 14 लोगों के खिलाफ घटना घटित करने की कोई वजह तक नहीं बताई है कि उक्त कृत्य घटना उनके साथ क्यों घटित हुआ! जबकि धौलपुर पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा का कहना है कि चंबल नदी के घाटों से अबैध रेत ट्राॅली, डम्पर और ट्रक में भरकर मुरैना से धौलपुर की सीमा में आते हैं और हमारी पुलिस इन रेत माफियाओं पर कार्यवाही करती है तो ये इस तरह की घटना को अंजाम देते हैं!

वे आगे कहते हैं कि सोमवार को हमारे दोनों पुलिस जवानों पर सिर्फ इसलिए हमला हुआ है क्योंकि वे रेत वाहनों पर सख्ती बरतते हैं!जबकि तथाकथित घटना स्थल के आसपास के निवासियों का कहना है कि धौलपुर पुलिस के उक्त दोनों जवान व एफ आई आर दर्ज करने वाले थानेदार द्वारा बाबा देवपुरी पर खड़े वाहन चालकों से अबैध बसूली कर रहे थे, जिससे आम जनता की भी उन पर पथराव कर दिया! मुरैना जिले की सीमा में धौलपुर पुलिस द्वारा की जा रही अबैध बसूली के लिए उनके विरुद्ध होने वाली कार्यवाही से बचने के लिए कहीं ये असत्य घटनाक्रम बनाकर झूठी तो नहीं की गई है ये आम चर्चा का विषय है! अब इसका असली सच क्या है? ये तो पुलिस जांच में ही स्पष्ट हो सकता है, मगर दोनों पुलिस जवानों की पिटाई में कई झोल अवश्य हैं जो होने वाली निसपच्छ जांच में सामने आयेंगे! मगर कुछ दिन बाद होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार में ऐदल सिंह कंषाना की मंत्री बनने की प्रबल दावेदारी और इस घटना का घटित होना क्या महज संजोग है या फिर सोची समझी एक साजिश? क्योंकि ये पहली दफा नहीं है जब इस तरह की मारपीट और लूट की घटना मुरैना के किसी विधायक के बिलकुल मंत्री पद के पास पहुंच जाने पर घटी हो! बल्कि इससे पहले भी भारतीय जनता पार्टी की 15 साल की सरकार में भी ऐसी घटना दो और तीन मर्तबा घट चुकी हैं! जब मुरैना के भाजपा विधायक रुस्तम सिंह को मंत्री पद के अत्यंत करीब पहुंच जाने के बावजूद मंत्री पद से हाथ धोना पढ़ गया था! अंततः रुस्तम सिंह जी को अंतिम दफा मंत्री बनने के तीन दिन पहले तात्कालिन पुलिस अधीक्षक मुरैना से आग्रह करना पड़ा था कि मंत्री पद की शपथ लेने के तीन दिन तक मुरैना के दो व्यापारियों के यहां स्टेशन रोड और सदर बाजार में सादी ड्रैस में 20 पुलिस के जवानों को तैनात कर दें जिससे उनकी बिरादरी के लोगों को इनको लूटने का मौका न मिले! मगर शपथ लेने के बाद भी इन दोनों व्यापारियों से कोई लूटपाट नहीं हुई, जो रुस्तम सिंह के विरुद्ध की गई साजिश को स्पष्ट करती है! क्या इस दफा भी सरकार बदल जाने के बावजूद वही कहानी फिर दोहराई जा रही है?केवल किरदार और घटना स्थल बदले हैं, मगर फिर वही मंत्रिमंडल के विस्तार के पूर्व वही कहानी एक बार फिर सामने है! केवल कहानी के हीरो रुस्तम सिंह की जगह अब ऐदल सिंह कंषाना हैं!क्या धौलपुर पुलिस को भ्रमित कर ये खेल खेला जा रहा है या वाकई कहीं कोई सच्चाई है? या फिर एक बार ये मुरैना के हक पर डांका डालने का कुत्सित प्रयास मात्र है?

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