कुम्भ को संयुक्त राष्ट्र संघ संस्था यूनेस्को ने अपनी मानवता की सांस्कृतिक धरोहर की सूचीमें शामिल किये जाने पर रिपोर्ट

 

 

 

प्रोफ. हेमंत महाला:   भारत में नदियों का पुरातन काल से ही विशेष महत्त्व रहा है। यह नदियों मात्र प्रकृति का हिस्सा या जल का स्रोत ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक धरोहर के रूप में विद्यमान है । बड़ी संख्या में होने वाले आयोजन, त्यौहार आदि नदियों के किनारे संपन्न होते हैं।ऐसा ही वृहद रूप से होने वाला आयोजन है कुम्भ। अभी हाल ही में संयुक्त राष्ट्र संघ संस्था यूनेस्को ने कुम्भ को अपनी -मानवता की सांस्कृतिक धरोहर की सूचीमें शामिलो किया है। विशेषज्ञों की समिति ने शिफारिश करते हुए यह भी कहा की कुम्भ पृथ्वी पर तीर्थ यात्रियों का सबसे बड़ाशांतिपूर्ण जमावड़ा हैI हम सभी जानते हैं की कुम्भ मेले का आयोजन तीन तीन सालों के अंतराल से हरिद्वार, अलाहबाद,नाशिक और उज्जैन इन चार स्थानों पर संपन्न होता हैI यानि एक स्थान पर कुम्भ बारह वर्षों के बाद आता है

इस उपलब्धि से यह स्पष्ट होता है की विदेशों में की भारत की प्राचीन संस्कृति एवं सांस्कृतिक आयोजनों का महत्व विदेशों में बढ़ा है। यह भी तय है की विश्व के लोगों में हमारी सांस्कृतिक धरोहरों के प्रति और उत्सुकता बढ़ेगी एवं उन्हें भारत की ओर आकर्षित करेगी और हमारा वैश्विक वर्चस्व भी बढ़ेगा ।इसके पूर्व २०१४ योग के लिए अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को मान्यता दी जिसमे १७७ से अधिक देशों ने हमारा समर्थन किया यह भी भारतीय प्राचीन परंपरा की वैश्विक उपलब्धि रहीI

कुम्भ एक धार्मिक आयोजन से कहीं बढ़कर राष्ट्रीय आयोजन है जिसमे सम्पूर्ण भारत से लाखों की संख्या में लोग अपने घर की अनुकूल अपरिस्थतियों को त्यागकर, विभिन्न  परिश्रम करके इतनी बड़ी संख्या में आनंद से एकत्रिक होते हैं। उत्सुकता के कारन कई वदेशी भी इस आयोजन में शामिल होते हैं । धरोहर के रूप में कोई ऐतिहासिक ईमारत या स्थान का होना स्वाभाविक है परन्तु एक आयोजन को यह स्थान मिलना यह  विशेष बात हैI

इस उपलब्धि का हम सब को उपलब्ध माध्यमों से प्रचार प्रसार करना चाहिए I सोशल मिडिया आदि में जिस प्रकार अन्य घटनाओं का प्रचार प्रसार और चर्चा दिखती है उस प्रकार अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धि  अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धि के बारे में नहीं दिखी I

प्रायः यह देखा देखा गया की हम जिस विषय की चर्चा करते है उसी विषय पर जागरूकता बढ़ती हैI और कोई भी अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धि की हम सभी को जानकारी होनी ही चाहिएI हम कूपमंडूक नहीं है, हमारी जानकारी स्थानीय घटनाओं तक ही सीमित नहीं है यह हमें तय करना ही होगा I भारत में कोई भी प्रभावित करने वाले स्थान को देखकर यह हम सभी ने कभी न कभी सुना है और शायद कहा भी होगा की लगा ही नहीं की हम भारत में है यह एक गंभीर और विचरने योग्य बात है I यह हमारे राष्ट्रीय गौरव ही विस्मृति की पराकाष्ठा हैI राष्ट्र का गौरव हम सब भारतीय नागरिकों का गौरव है यह हमें आत्मसात करना चाहिए I

प्रोफ. हेमंत महाला                                                                                                                  भोपाल

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