कांग्रेस :कर्नाटक से एमपी वाया गोवा खतरा ही खतरा

 

गोपाल गुप्ता:

कर्नाटक में अपनी और जनता दल (सैकुल्यर) नीत 14 माह पुरानी सरकार को बचाने की हर संभव कोशीश कर रही कांग्रेस को गोवा मानों गिफ्ट में ही मिल गया हो! कर्नाटक में जहां उसके 13 और जेडीएस के 3 विधायकों ने इस्तीफा देकर जहां मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की सरकार को झूला झूलने के लिए मजबूर कर दिया है!वहीं कांग्रेस के गोवा में बीच में बीच में सरकार बनाने के दावों पर वर्तमान विधानसभा के शेष कार्यकाल तक कांग्रेस के ही 10 विधायकों ने भारतीय जनता पार्टी में शामिल होकर हवा निकाल दी है! कर्नाटक संकट से निबटने में पूरी ताकत से लगी कांग्रेस के लिए यह (गोवा) सरप्राइज जैसा ही है! क्योंकि कांग्रेस के इस संकट कालीन समय के एजेंडे में मध्य प्रदेश तो शामिल माना जा रहा था,मगर अचानक गोवा के आ जाने से पार्टी अपने-आपको ठगा महसूस कर रही है! मार्च 2017 में हुये गोवा विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, जबकि भाजपा मात्र 11 पर अटक गई थी! चूकि कांंग्रेस सबसा बड़ा दल था और उसे बहुमत के लिए मात्र दो सीटें की जरुरत थीं! बड़ा दल होने के कारण राज्यपाल सरकार बनाने के लिए कांग्रेस को ही न्योता देंगे यही सोचकर कांग्रेस प्रभारी और मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह होटल में ही आराम फरमाते रहे! इधर भाजपा ने अध्यक्ष अमित शाह के ईशारे पर विधायकों की तोड़-फोड़कर सरकार बनाने का दावा राज्यपाल के सामने पेश कर अपनी सरकार बना ली! तबसे भाजपा कांग्रेस और सहयोगी महाराष्ट्र गोमांतक पार्टी में तीन दफा तोड़कर अपनी स्थिति काफी मजबूत कर चुकी है! अब राज्य में कांग्रेस के मात्र पांच विधायक रह गये हैं!

कर्नाटक में कांग्रेस के 12 विधायक और एक निलंबित विधायक व सहयोगी जनता दल एस के तीन विधायकों द्वारा सदन से इस्तीफा दे देने के बाद अब मुख्यमंत्री कुमारस्वामी की सरकार अल्पमत में आ चुकी है! हालांकि मामला अभी विधानसभा के स्पीकर के आर रमेशकुमार के कार्यालय में अटका है मगर माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर स्पीकर रमेशकुमार को विधायकों के इस्तीफे आज ही फैसला लेना है! बहरहाल मात्र 14 महिने पहले मई 2018 में बनी इस सरकार पर अब तक ये चौथा संकट है जो शायद सरकार का चौथा करके ही जाये! अतः कांग्रेस को अपनी ऊर्जा गोवा और कर्नाटक संकट से निकल कर अब अपनी मध्यप्रदेश में हाल ही में बनी कांग्रेस सरकार को बचाने में लगानी चाहिये! क्योंकि सर्वविदित है कि मंत्री न बनाये जाने से कर्नाटक की तरह यहां भी दर्जनभर से ज्यादा विधायक सरकार से रुष्ट हैं, इनमें से कुछ की नजदीकियां भाजपा नेताओं से यकायक बढ़ गई हैं! जो भाजपा नेताओं की इन धमकियों को कारगर साबित करने के लिए काफी हैं कि जब साहब ईशारा कर देंगें उसी समय एमपी में कांग्रेस की सरकार गिर जायेगी! सूत्रों की मानी जाये तो अंसतुष्ट कांग्रेस विधायकों को मंत्री पद तो कुछ को मोटी रकम देने की पेशकस हो चुकी है ,जबकि कांग्रेस मुख्यमंत्री कमलनाथ ,दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे में ही उलझी हुई है! एक बड़े भाजपा नेता के भाई ने अपना गुप्त रखने की शर्त पर दावा ही कर दिया है कि अब प्रदेश की सत्ता से कांग्रेस की उलटी गिनती शुरु हो चुकी है! कांग्रेस को चाहिए कि वो मप्र में अपना घर मजबूत करे अन्यथा जनता द्वारा भले ही कांग्रेस भारत मुक्त नहीं किया जा सका है!मगर पैसा और ताकत से लबरेज भाजपा उसके विधायकों की तोड़-फोड़कर जरुर कांग्रेस मुक्त भारत कर देगी और इसमें जनता भी उसकी कोई मदद नहीं कर पायेगी! उदाहरण के तौर पर कर्नाटक और गोवा मुंह फाड़े सामने खड़े हैं!

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