करीला मेला संपन्न, लाखों श्रृद्धालुओं ने किए माता के दर्शन

अशोकनगर, 18 मार्च । प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी अशोकनगर जिले की मुंगावली तहसील की ग्राम पंचायत जसैया के ग्राम करीला में रंगपंचमी के अवसर पर विशाल मेले का आयोजन हुआ। इस तीन दिवसीय मेले का शनिवार को समापन हुआ। 16 मार्च को शुरू हुए इस मेले में पहुंचकर लाखों श्रद्धालुओं ने करीला माता के दर्शन किए और पुण्य लाभ अर्जित किया। सबसे ज्यादा भीड़ रंगपंचमी के दिन शुक्रवार को देखने को मिली। शनिवार को भी सुबह से लाखों लोग मेले में पहुंचे। इस वर्ष सुरक्षा व्यवस्था व श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखकर व्यापक इंतजाम किए गए थे। कमिश्नर ग्वालियर संभाग एस.एन.रूपला, कलेक्टर बी.एस.जामोद एवं पुलिस अधीक्षक संतोष सिंह गौर ने मंदिर परिसर में व्यवस्थाओं का जायजा लेते रहे और अधीनस्थ अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश देकर उन्होने व्यवस्थाओं को बेहतर बनाया। रंगपंचमी पर शुक्रवार को सुबह से ही श्रद्धालुओं का करीला धाम आना प्रारंभ हो गया था। रंगपंचमी के दिन देर रात में लाखों श्रद्धालुओं ने मॉ जानकी के मंदिर में शीश नवाया तथा दर्शन लाभ लिए। शनिवार को सुबह से दोपहर तक मां मॉ जानकी के दरबार में भीड़ जुटी रही। यहां आकर लाखों श्रद्धालुओं ने माता जानकी मैया के जयकारों के साथ रैलिंग में कतारबद्ध होकर दर्शन किए तथा मन्नतें मॉगी। मन्नतें प्राप्त हजारों श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर के बाहर राई नृत्य करवाया। करीला के मुख्य मंदिर में मॉ जानकी के साथ-साथ महर्षि वाल्मिकि व लव-कुश की प्राचीन प्रतिमायें स्थापित है। साथ ही राम दरबार व राधाकृष्ण की मूर्तियां भी मंदिर परिसर में स्थापित की गयी है। करीला धाम में मान्यता है कि जिसके सन्तान न हो वह यहां आकर मन्नतें मॉगें तो उसकी मुराद मॉ जानकी पूरी करती हैं। मुराद पूरी होने पर श्रद्धालु यहां आकर अपनी श्रद्धानुसार राई नृत्य करवाते है। क्षेत्र में यह लोकोक्ति प्रचलित है कि लव व कुश के जन्म के बाद मॉ जानकी के अनुरोध पर महर्षि वाल्मिकि ने उनका जन्मोत्सव बडी धूम-धाम से मनाया था। जिसमें स्वर्ग से उतरकर अप्सरायें आई थी तथा उन्होंने यहॉ नृत्य किया था। वही जन्मोत्सव आज भी रंग पंचमी के अवसर पर यहॉ मनाया जाता है। उसी उत्सव में हर वर्ष सैकडों नृत्यांगनायें यहॉ राई नृत्य प्रस्तुत करती है। नृत्यांगनाएं ओढऩी से घूंघट डाले नगडिय़ों की गूंज एवं मृदंग की थाप पर लम्बे घेर वाले लंहगे एवं पैर में घुंघरू की खनखनाती आवाज पर मनमोहक अदाओं के साथ रातभर नृत्य करती रहीं। ऐसा लग रहा था मानो अप्सराएं जमीन पर उतरकर जन्मोत्सव की खुशी मना रही हों। शनिवार को सुबह नृत्यांगनाओं द्वारा प्रस्तुत बधाई नृत्य के साथ मेला का समापन हुआ। कलेक्टर बी.एस.जामोद एवं पुलिस अधीक्षक संतोष सिंह गौर द्वारा करीला पहुंचकर मेले की सुरक्षा व्यवस्थाओं के साथ-साथ सम्पूर्ण मेले की व्यवस्थाओं का जायजा लेते रहे। मेला परिसर में पेयजल सहित विद्युत, स्वच्छता तथा सुरक्षा की बेहतर व्यवस्था कराई गई। कलेक्टर द्वारा जिले सभी विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मेला व्यवस्थाओं के लिए दायित्व सौंपे गए थे। जिसके तहत सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने पूरी मुस्तैदी के साथ कार्य किया। सेक्टर मजिस्ट्रेटों द्वारा दर्शनार्थियों को कोई असुविधा न हो इस पर विशेष ध्यान दिया गया। पुलिस के जवान मंदिर परिसर में बनाए गए 35 फिट वॉच टावर पर पहुंचकर दूरबीन से सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लेते रहे। साथ ही मंदिर परिसर एवं मेला स्थल पर लगाए गए सी.सी.टी.वी.कैमरों से मेले पर सतत निगरानी रखे रहे। मेला व्यवस्था में आवागमन को सुगम बनाने हेतु चप्पे-चप्पे पर पुलिस की तैनाती की गई थी। मेले में पानी के विशेष इंतजामों के साथ ही पानी के टेंकरों द्वारा पानी की सप्लाई की व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी। नवीन डकबेल के निर्माण होने से पानी की समस्या का समाधान हुआ। प्रत्येक टेंकर में टोटियां लगवाई गई थीं जिसके कारण मेले में पानी की कोई भी परेशानी नहीं हुई। मेले में शिरकत करने आने वालों लोगों ने मेले का भरपूर आनंद लिया। मेले में लगे बड़े-बड़े झूलों का युवाओं ने तथा छोटे झूलों का बच्चों ने झूलकर आनंद लिया। ग्रामीणों द्वारा मेले में लोहे के कढ़ाईयों एवं सामग्री की खरीदी की गई। साथ ही दुकानों में व्यंजनों का स्वाद भी ग्रामीणों द्वारा लिया गया।

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