कमाई के लिए निजी स्कूलों की मनमानी जारी

 

1

भोपाल। प्रदेश में शासन का निर्णय अभिभावकों को राहत दिलाने के बजाए उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ का कारण बन रहा हैं। शासन द्वारा जारी निर्देशों के पालन में निजी स्कूल संचालकों ने किताबों की सूची में एनसीईआरटी की कुछ किताबों को शामिल तो कर लिया है, लेकिन उसी विषयों की निजी प्रकाशकों की किताब खरीदना भी अनिवार्य है। नतीजा अभिभावकों को किताब का दोहरा खर्च उठाना पड़ रहा है।

निजी प्रकाशकों की किताब में मिलने वाला अच्छा कमीशन पाने के फेर में ज्यादातर स्कूल संचालक अभिभावकों पर दोहरा खर्च थोप रहे हैं। शहर के नामचीन स्कूलों ने अभिभावकों को किताबों की लंबी चौड़ी लिस्ट पकड़ा दी है, जिससे स्कूलों को मोटा कमीशन और अभिभावकों को दो गुना आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। निजी प्रकाशक अपनी किताब चलाने के लिए स्कूलों को प्रति किताब 30 से 35 फीसदी का कमीशन दे रहे हैं। कुछ किताबें तो ऐसी हैं, जिन पर संचालकों को 40 फीसदी तक का कमीशन मिल रहा है। इस तरह की ज्यादातर किताबों को संचालकों द्वारा जबरन पाठ्यक्रम में शामिल किया जा रहा है।

किताबों के सेट का रेट

कक्षा नर्सरी से यूकेजी तक 1500 से 2000 रुपये तक
कक्षा एक से तीन तक 2200 से 2500 रुपये तक
कक्षा चार से छठी तक 2500 से 3000 रुपये तक
कक्षा छठीं से नवीं तक 3000 से 400n>रुपये तक
कक्षा 10 वीं से 12 वीं तक 4000 से 4500 रुपये तक

Shares