एक रुपए प्रतिमाह का टैक्स, फिर भी बसों के लेते हैं हजारों रुपए

इंदौर- डीपीएस के पूर्व प्रिंसिपल की गिरफ्तारी के बाद सहोदय ग्रुप जिन बसों को बंद करने की धमकी दे रहा है, उनसे स्कूलों की जमकर कमाई हो रही है। सरकार ने स्कूल बसों का टैक्स माफ करते हुए प्रति सीट केवल एक रुपए प्रतिमाह कर दिया है, जबकि यात्री बसों से 180 रुपए प्रति सीट लिए जाते हैं।

स्कूल बसों की फीस को लेकर कोई मापदंड नहीं है। कई बार किराया निर्धारण की शासन की घोषणा के बावजूद स्कूली बसों फीस तय नहीं हो पाई। इसी का नतीजा है कि स्कूल संचालक मनमाना किराया वसूलते हैं। शहर में हर स्कूल 11 माह की फीस वसूलते हैं, जबकि अप्रैल और जून में अधिकांश स्कूल आधा माह ही लगते हैं। कई स्कूलों में तो अनुमति पत्र पर हस्ताक्षर करवा लिए जाते हैं।

कंपनी बनाकर खेल

ज्यादातर स्कूलों का संचालन कर रही संस्थाएं स्कूल ट्रस्ट सोसायटी के रूप में पंजीकृत है। ‘नो प्रॉफिट नो लॉस’ के अधार पर इनका संचालन बताया जा रहा है। हर साल बढ़े खर्च और बैलेंस शीट में घाटा दिखाकर ही स्कूलों को फीस बढ़ाने की अनुमति मिल रही है। बैलेंस शीट में मुनाफा कम दिखाने के लिए स्कूलों ने नए फॉर्मूले पर अमल शुरू कर दिया है।

ट्रांसपोर्टेशन के लिए वसूली जा रही फीस की रसीद स्कूल के बजाय किसी और सेवा प्रदाता कंपनी के नाम से दी जा रही है। असल में कंपनी स्कूल संचालकों की ही होती है, लेकिन ऐसा करने से ट्रांसपोर्टेशन के रूप में मिलने वाला पैसा स्कूल की आय में नहीं आकर खर्च में जुड़ जाता है। लिहाजा आधार बनाकर स्कूलों को फीस बढ़ाने का मौका भी मिल जाता है। डीपीएस ने भी ऐसी ही एक अलग कंपनी बनाकर बस की फीस ली थी।

इस तरह से वसूल रहे फीस

स्लैब 1 : दूरी किराया (प्रतिमाह)

0 से 5 किलोमीटर 1500 रुपए

5 से 10 किलोमीटर 1700 रुपए

10 से 15 किलोमीटर 1900 रुपए

स्लैब 2 : किराया प्रतिवर्ष

0 से3 किलोमीटर 9 हजार रुपए

3 से 6 किलोमीटर 14 हजार रुपए

6 से 10 किलोमीटर 19 हजार रुपए

स्लैब 3 : (किराया प्रतिवर्ष)

0 से 3 किलोमीटर 6 हजार रुपए

3 से अधिक किलोमीटर 11 हजार रुपए

स्लैब 4 : (किराया प्रतिमाह)

0 से 10 किलोमीटर 1100 रुपए

10 से अधिक 1300 रुपए

स्लैब 5

कुछ स्कूल 12 से 22 हजार रुपए प्रतिवर्ष लेते हैं।

(कुछ स्कूल जिनकी बसें एसी हैं, वे अधिक किराया लेते हैं।)

यह है स्कूल बस पर खर्च

डाइवर : 10 हजार रुपए प्रतिमाह

कंडक्टर : 6 हजार रुपए

महिला कर्मचारी : 5 हजार रुपए (अधिकांश बसों में नहीं है)

प्रतिमाह डीजल :10 से 12 हजार रुपए

जीपीएस चार्ज : 1500 से 2000 प्रतिवर्ष

सीसीटीवी : एक बार के 3 हजार रुपए

स्पीड गवर्नर : एक बार में 3600 से 5 हजार रुपए

मेंटेनेंस : 10 से 15 हजार रुपए साल

फिटनेस : दो हजार रुपए साल

परमिट : एक बार में 5 हजार रुपए

टैक्स : 1 रुपए सीट प्रतिमाह

(जानकारी स्कूलों के ट्रांसपोर्ट मैनेजरों के मुताबिक )

पूर्व आरटीओ ने बनाया था प्रस्ताव, नहीं हो पाया लागू

पूर्व आरटीओ एमपी सिंह ने स्कूलों की इस मनमानी से परेशान होकर करीब दो साल पहले शासन को एक प्रस्ताव भेजा था। इसमें दूरी के हिसाब से किराया लेने के लिए कहा था, जिसमें एक से 10 किलोमीटर में रहने वाले छात्रों से 700 रुपए प्रतिमाह, 10 से 14 किलोमीटर पर 800, 15 से 24 किलोमीटर पर 900 और 25 किलोमीटर पर 1000 रुपए प्रतिमाह किराया वसूलने के लिए कहा गया था। यह प्रस्ताव लागू नहीं हो पाया।

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