अजीत डोभाल ने हवाई सर्वेक्षण कर लिया सुरक्षा व्यवस्था का जायजा

श्रीनगर, 12 अगस्त । राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने सोमवार को कश्मीर घाटी में सुरक्षा स्थिति का जायजा लेने के लिए हवाई सर्वेक्षण किया और स्थानीय लोगों ने कड़े सुरक्षा बंदोबस्त के बीच ईद की नमाज अदा की।
अधिकारियों के अनुसार पुलिस प्रमुख दिलबाग सिंह और सेना के कमांडरों ने भी हवाई सर्वेक्षण किया और स्थिति को बिल्कुल ठीक पाया। गृह मंत्रालय तथा जम्मू और कश्मीर पुलिस के अनुसार कई स्थानों पर प्रतिबंध के बावजूद स्थानीय मस्जिदों में शांति के साथ नमाज अदा की गई।
जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 समाप्त होने के दूसरे दिन से कश्मीर घाटी की यात्रा पर आए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने सोमवार को श्रीनगर के कई संवेदनशील इलाकों का दौरा किया। ईद-अल-अजहा (बकरीद) के मौके पर अजीत डोभाल श्रीनगर के लाल चौक गए। इस दौरान वह उन इलाकों में भी गए जो सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील माने जाते हैं। अजीत डोभाल अपनी पूरी टीम के साथ श्रीनगर के डाउनटाउन के अंतर्गत सौरा, पंपोर, लाल चौक और हजरतबल गए और मौजूदा स्थिति का जायज़ा लिया। इसके अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पुलवामा और अवंतीपुरा जिले में भी पहुंचे। इन सब में ज्यादातर वह इलाके हैं, जिनमें विरोध प्रदर्शन और देश विरोधी नारे व पाकिस्तान समर्थित नारे लगना एक आम बात थी। इसके बावजूद पूरे जम्मू-कश्मीर में सोमवार को शांति, आपसी भाईचारे तथा धार्मिक सौहार्द्र का प्रतीक माने जाने वाली ईद-उल-अजहा का त्योहार पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
सूत्रों के अनुसार जम्मू-कश्मीर में 10,000 से ज्यादा लोगों ने ईद-अल-अजहा के मौके पर विभिन्न दरगाहों व मस्जिदों में शांतिपूर्वक नमाज़ अदा की। इस दौरान प्रशासन द्वारा दरगाहों व मस्जिदों के बाहर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। कई मस्जिदों के बाहर पुलिस कर्मियों ने भी मिठाई बांटकर लोगों को ईद की बधाई दी।
राज्य पुलिस ने कहा कि घाटी में बड़ी सभाओं की अनुमति नहीं थी लेकिन लोगों को नमाज़ अदा करने के लिए अपने नजदीकी मस्जिदों में जाने की अनुमति दी गई। ईद की पूर्व संध्या पर भी श्रीनगर में कर्फ्यू लगाया गया था, क्योंकि प्रशासन ने जम्मू और कश्मीर में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए कई उपाय किए थे। सुरक्षा बलों की भारी तैनाती, कॉन्सर्टिना के तार और बैरिकेड्स सड़कों पर वापस आ गए थे और रविवार को सार्वजनिक आंदोलन पर अंकुश लगा था। कई स्थानों पर पुलिस ने वेंडर्स को अपने स्टाल बंद करने और घर लौटने की हिदायत दी थी।
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