अंतरिक्ष में भारत की बड़ी उड़ान, चांद के लिए उड़ा चंद्रयान-2, श्रीहरिकोटा से हुआ लॉन्च

नई दिल्ली. भारत का दूसरा मून मिशन सोमवार दोपहर श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च हो गया है. इसरो के महत्वकांक्षी मून मिशन चंद्रयान- 2 को दोपहर 2.43 बजे लॉन्च किया गया. चंद्रयान 2 कुल 13 भारतीय वैज्ञानिक उपकरणों को ले जा रहा है. 48वें दिन दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग होगी.

ISRO

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Launch of Chandrayaan 2 by GSLV MkIII-M1 Vehicle https://www.pscp.tv/w/cAVvsTFQWEtkcGtnTVd5S2V8MW5BS0V6QVZnWEFHTCEkYBHlHmdblgWs3EdGbY65JENrVKEYg7mLkyaypslO 

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Launch of Chandrayaan 2 by GSLV MkIII-M1 Vehicle

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चंद्रयान- 2 के सफल प्रक्षेपण पर नितिन गडकरी ने और पीयूष गोयल ने बधाई दी है. आप नेता कुमार विश्वास ने चंद्रयान की सफलता पूर्वक लॉंचिंग पर ट्वीट कर बधाई दी है.

Dr Kumar Vishvas

@DrKumarVishwas

Here you go 👍🇮🇳 Proud of you, The Team 😍
“स्वर्ग के सम्राट को जाकर ख़बर कर दो,
रोज ही आकाश चढ़ते आ रहे है हम..!”❤️ https://twitter.com/ani/status/1153232735588233216 

ANI

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#WATCH: GSLVMkIII-M1 lifts-off from Sriharikota carrying #Chandrayaan2 #ISRO

एम्बेडेड वीडियो

रविवार शाम 6:53 बजे से चंद्रयान-2 की करीब 20 घंटे की उलटी गिनती शुरू की गई थी
उड़ान से पहले लिक्विड हाइड्रोजन की फिलिंग पूरी की गई. श्रीहरिकोटा स्थित ISRO के मिशन कंट्रोल सेंटर में इस मिशन की निगरानी 250 वैज्ञानिक कर रहे हैं.

ये लॉन्चिंग पहले 15 जुलाई को होनी थी, लेकिन आखिरी मौके पर कुछ तकनीकी खामी सामने आने के बाद लॉन्चिंग टाल दी गई. दरअसल भारतीय वैज्ञानिक बारिकी से मिशन के हर पड़ाव पर नजर रखते हैं और लॉन्चिंग टलने के बाद मिशन कामयाब होने का चांस और बढ़ गया है.

सब कुछ ठीक रहा तो भारत दुनिया का पहला ऐसा देश बन जाएगा जो चांद की दक्षिणी सतह पर उतरेगा. यह वह अंधेरा हिस्सा है जहां उतरने का किसी देश ने साहस नहीं किया है. ये भारत का दूसरा चांद मिशन है. इससे पहले 2008 में चंद्रयान-1 को भेजा गया था.

साउथ पोल पर होगी लैंडिंग
चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग चांद के साउथ पोल पर एक रोवर को उतारने के उद्देश्य से की जा रही है. अभी तक इस जगह पर कोई भी देश नहीं पहुंचा है.

ISRO ने किए ये अहम बदलाव

  • ISRO ने चंद्रयान-2 की यात्रा के दिन 6 दिन कम कर दिए हैं. इसे 54 दिन से घटाकर 48 दिन कर दिया गया है. देरी के बाद भी चंद्रयान-2 6 सितंबर को चांद के साउथ पोल पर लैड करेगा.
  • ISRO ने चंद्रयान-2 के लिए पृथ्वी के चारों तरफ अंडाकार चक्कर में बदलाव किया है, एपोजी में 60.4 किमी का अंतर आ गया है.
  • इसके साथ ही ISRO ने पृथ्वी के ऑर्बिट में जाने का समय करीब एक मिनट बढ़ा दिया गया है.
  • वहीं, चंद्रयान-2 की वेलोसिटी में 1.12 मीटर प्रति सेकंड का इजाफा किया गया है.
  • इसके साथ ही ISRO ने पृथ्वी के ऑर्बिट में जाने का समय करीब एक मिनट बढ़ा दिया गया है.
  • वहीं, चंद्रयान-2 की वेलोसिटी में 1.12 मीटर प्रति सेकंड का इजाफा किया गया है.

रॉकेट में एक ‘तकनीकी दिक्कत’ के कारण 15 जुलाई की सुबह इसे लॉन्च होने से रोक दिया गया था. दिक्कत तब आई थी, जब लिक्विड प्रोपेलेंट को रॉकेट के स्वदेशी क्रायोजेनिक अपर-स्टेज इंजन में लोड किया जा रहा था.

चंद्रयान-1 का सेकेंड एडिशन है चंद्रयान-2– चंद्रयान-2 वास्तव में चंद्रयान-1 मिशन का ही नया एडिशन है. इसमें ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) शामिल हैं. चंद्रयान-1 में सिर्फ ऑर्बिटर था, जो चंद्रमा की कक्षा में घूमता था.

चंद्रयान-2 के जरिए भारत पहली बार चांद की सतह पर लैंडर उतारेगा. यह लैंडिंग चांद के साउथ पोल पर होगी. इसके साथ ही भारत चांद के दक्षिणी ध्रुव पर स्पेसक्राफ्ट उतारने वाला पहला देश बन जाएगा.

तीन हिस्सों में बंटा है चंद्रयान-2
चंद्रयान-2 के तीन हिस्से हैं-ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर. अंतरिक्ष वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के सम्मान में लैंडर का नाम विक्रम रखा गया है.

इसरो का सबसे मुश्किल मिशन
इसे इसरो का सबसे मुश्किल अभियान माना जा रहा है. सफर के आखिरी दिन जिस वक्त रोवर समेत यान का लैंडर चांद की सतह पर उतरेगा, वह वक्त भारतीय वैज्ञानिकों के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं होगा.

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